धोनी के रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं ऋषभ पंत, 10 साल तक तीनों फॉर्मेट में देंगे टीम इंडिया को योगदान : मोरे

नई दिल्ली (New Delhi) . इंग्लैंड के खिलाफ चार टेस्ट की सीरीज शुरू होने से पहले भारत की टर्निंग पिचों पर विकेट के पीछे ऋषभ पंत की क्षमता को लेकर संदेह किया जा रहा था, लेकिन 4 टेस्ट में अकेले 428 ओवरों तक स्पिनर्स (Nurse) के लिए विकेटकीपिंग करने और इसी दौरान पांच स्टम्पिंग और 8 कैच पकड़ने के बाद पंत ने अपने आलोचकों को गलत साबित कर दिया है. इस वजह से टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर और चयन समिति के पूर्व चेयरमैन किरण मोरे को लगता है कि वह महेंद्र सिंह धोनी के तमाम रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं.

यह भारतीय टीम के सीनियर विकेटकीपर रिद्धिमान साहा के लिए तकलीफदेह हो सकता है, जिनकी पंत ने घरेलू टेस्ट सीरीज में जगह ली है. पंत ने इस भारतीय टीम को वह संतुलन दिया है, जिसकी उसे लंबे समय से तलाश थी. चौथे टेस्ट के दूसरे दिन पंत की शानदार बल्लेबाजी इस बात का उदाहरण थी कि उन्हें क्यों टेस्ट क्रिकेट में साहा पर तरजीह दी जा रही है.

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पूर्व भारतीय विकेटकीपर मोरे बतौर विकेटकीपर पंत में आए सुधार से प्रभावित हैं. कम से इस सीरीज को लेकर तो उनकी यही सोच है. इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में खत्म हुई 4 टेस्ट की सीरीज पंत के 20 टेस्ट लंबे करियर में घर में दूसरी सीरीज है. पिछली बार 2018 में वह वेस्टइंडीज के खिलाफ 2 टेस्ट की घरेलू टेस्ट सीरीज में बतौर विकेटकीपर टीम का हिस्सा थे, क्योंकि तब कंधे की सर्जरी की वजह से साहा नहीं खेले थे. हालांकि, चोट के बाद घरेलू सीरीज में साहा ने वापसी कर ली थी और उन्होंने 2019 में दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज में विकेटकीपिंग की थी. इसके बाद से ही ये एक अलिखित सा नियम बन गया था कि पंत विदेश और साहा घर में टेस्ट सीरीज में विकेटकीपर के तौर पर खेलेंगे.

मोरे को यह ठीक नहीं लगता. उन्होंने कहा मैंने हमेशा सोचा है कि पंत भारत में पहले क्यों नहीं खेले. इंग्लैंड में 2018 में अपनी डेब्यू टेस्ट सीरीज में उन्होंने बतौर विकेटकीपर काफी अच्छा प्रदर्शन किया था. वहां पंत ने तीन टेस्ट में 15 कैच पकड़े थे. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी उनका प्रदर्शन अच्छा रहा था. तब उन्होंने 4 टेस्ट में 20 कैच पकड़े थे. इसमें अकेले 11 कैच तो उन्होंने ए़डिलेड में हुए सीरीज के पहले टेस्ट में पकड़े थे. किसी भी भारतीय विकेटकीपर का सबसे बेहतर प्रदर्शन था. इसके बावजूद उन्हें घरेलू सीरीज में विकेटकीपिंग का मौका नहीं मिला.

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मोरे उस सीनियर सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन थे जिसने महेंद्र सिंह धोनी को सन 2000 में बतौर विकेटकीपर टीम में चुना था. उन्हें लगता है कि पंत भी धोनी के नक्शे कदम पर चल सकते हैं. मोरे को यह लगता है कि एक खिलाड़ी रोज सीखता है. खासतौर पर एक विकेटकीपर जब अलग-अलग पिच पर विकेटकीपिंग करता है, तो उसका अनुभव बढ़ता है. पंत अभी यही कर रहे हैं. वह इस समय भारत के सबसे बेहतर स्पिनर्स (Nurse) और तेज गेंदबाजों के लिए विकेटकीपिंग कर रहे हैं. अगर वह ऐसे ही सीखते रहे तो मुझे पूरा यकीन है कि वह एक दिन महेंद्र सिंह धोनी के रिकॉर्ड को भी तोड़ देंगे.

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उन्होंने कहा कि काफी लोगों के मन में यह सवाल है कि भविष्य में भारत के लिए पंत और साहा में से कौन खेलेगा. इसमें कोई संदेह नहीं है कि साहा बड़े विकेटकीपर हैं. वह इस समय दुनिया के बेस्ट विकेटकीपरों में से एक हैं. जब आप टीम में संतुलन चाहते हैं, तो पंत का नाम सबसे पहले आता है. वह 6 नंबर पर आकर अकेले आपको टेस्ट जिता सकते हैं. ठीक वैसे ही जैसा ऑस्ट्रेलिया के लिए एडम गिलक्रिस्ट किया करते थे. मुझे लगता है कि पंत यहां से आने वाले 10 सालों तक तीनों ही फॉर्मेट में भारत के लिए ऐसा करेंगे. टीम मैनेजमेंट को ये फैसला करना होगा कि वह कब उन्हें आराम देता है.

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