मात्र 11 मिनिट में एन्जियोप्लासटी कर बचाई मरीज की जान

एक्यूट लैफ्ट मैन कोरोनरी ऑक्लूजन के मामलों में विश्व में अब तक मात्र 5 ही मरीज बच पायें है

उदयपुर. हार्ट अटैक में सामान्यत 3 धमनियों में से काई एक धमनी में ब्लॉकेज आकर बंद होती है लेकिन ह्रदय की मुख्य कोरोनरी आर्टरी (लैफ्ट मैन) का बंद होकर हार्ट अटैक आना बहुत ही दुर्लभ है. ऐसे मरीज हार्ट अटैक के समय ही मर जाते हंै. वे अस्पताल तक भी नहीं पहुंच पाते हैं. ऐसा ही मामला गत दिनों उदयपुर के पारस जे. के. हॉस्पिटल में देखने को मिला जहां नाथद्वारा निवासी विजेन्द्र गुर्जर की मात्र 11 मिनिट में एन्जियोप्लास्टी कर जान बचाई गई.

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हॉस्पिटल के ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सी. पी. पुरोहित ने बताया कि 60 वर्षीय विजेन्द्र गुर्जर अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जबरदस्त हार्ट अटैक के साथ आया व अस्पताल के मुख्य दरवाजे पर ही गिर गया. इस परिस्थिति में मरीज को इमरजेंसी में तुरंत ही सी.पी.आर कर उसको पुनर्जीवित किया. इसके बाद मरीज की तुरंत ही एन्जियोग्राफी की गई जिसमें पता चला कि उसकी बॉयी मुख्य धमनी में 100 प्रतिशत रुकावट है जिसके कारण उसको जानलेवा घातक हार्ट अटैक आया है. इस प्रकार की स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में एक्यूट लैफ्ट मैन कोरोनरी ऑक्लूजन कहते हैं. इसमें मरीज को तुरंत ही उपचार की आवश्यकता होती है. ऐसा नहीं करने पर मरीज की तुरंत ही मृत्यु हो जाती हैै.

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डॉ. पुरोहित ने बताया कि मेडिकल जनरल्स के मुताबिक विश्व में आज तक ऐसे मामलों में मात्र 5 ही मरीज हैं जो बच पाये हैं. ऐसे मामलों में समय का बहुत बड़ा योगदान है. इसमें हमने बिना समय गवायें इमरजेंसी में मरीज का उपचार किया और उसका जीवन बचाया. मरीज अब स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है.

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अस्पताल के डायरेक्टर विश्वजीत ने बताया कि इस मामले में अस्पताल की टीम डॉ. सी.पी. पुरोहित, डॉ. हरीष सनाढ्य, डॉ. नीतिन कौशिक एवं डॉ. चेतन क्रिटिकल बधाई के पात्र हैं जिन्होंने इस ऑपरेशन को सफल बनाया. उन्होंने कहा कि सी.पी.आर. व समय पर उपचार मिलने के कारण मरीज की जान बच पाई है. अस्पताल में समय-समय पर सी.पी.आर. की नि:शुल्क टे्रनिंग दी जाती है.

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