सेबी ने चेयरमैन-एमडी पद अलग करने की नियत अवधि 2 साल बढ़ाई

मुंबई . पूंजी बाजार की नियामक संस्था सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों में चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद को अलग करने के नियमों का पालन करने की अंतिम समय सीमा दो साल बढ़ा दिया है. इस नियम के पालन के लिए तय 31 मार्च की डेडलाइन के खिलाफ कई शीर्ष कंपनियों और उद्योगपतियों ने जोरदार लॉबिंग करने के साथ ही इसका पुरजोर विरोध किया था.

सेबी ने सोमवार को ऐलान किया कि इस नियम को अपनाने की नई नियत तिथि 1 अप्रैल 2022 होगी, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि समय सीमा को किस वजह से टाला गया है. एक सीनियर रेगुलेटरी अफसर ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, ‘इस नियम के पालन के लिए सेबी से ट्रेड एसोसिएशंस सहित कई संगठनों की तरफ से ज्यादा वक्त मांगा गया था. मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए सेबी ने कंपनियों पर एडिशनल कंप्लायंस का बोझ नहीं डालने का फैसला किया है.’ कॉर्पोरेट और इंडस्ट्री बॉडीज ने कहा है कि इसे लागू किए जाने के विरोध की सबसे बड़ी वजह वह रूल है जिसके मुताबिक कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर में रिश्तेदारी में नहीं होने चाहिए.

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बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज ने कहा, ‘मेरा मानना है कि इन रोल्स को अलग करना कंपनी और उसके शेयरहोल्डर्स ही नहीं, बल्कि चेयरमैन और एमडी के हित में भी है क्योंकि इससे पूरी कंपनी में रिस्पॉन्सिबिलिटी और अकाउंटेबिलिटी को लेकर क्लैरिटी आएगी. हालांकि इन पोस्ट्स के लिए प्रोफेशनल्स का चुनाव मेरिट के हिसाब से होने देना चाहिए और इसके बीच रिश्तेदारी को आड़े नहीं आने देना चाहिए. अगर सेबी ने इस रिक्वायरमेंट को लेकर जोर नहीं डाला होता तो शायद इंडस्ट्री नए नॉर्म्स को तय समय पर अपना लेती.’

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इंडस्ट्री बॉडी एफआईसीसीआई के एक मेंबर ने कहा कि चेयरमैन और एमडी के रिश्तेदार नहीं होने के नियम से प्रमोटरों में बड़ी घबराहट मची है. एफआईसीसीआई के फॉर्मर प्रेसिडेंट संदीप सोमानी ने कहा, ‘मसला यह है कि कोटक कमेटी ने अपनी सिफारिश में यह नहीं कहा था कि चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रिश्तेदार नहीं हो सकते. 70-80 प्रतिशत इंडियन कंपनियों की बागडोर प्रमोटरों के हाथों हैं. दुनिया के किसी देश में ऐसा रूल नहीं है. कारोबार की बागडोर अपने बच्चों के हाथों में देने के लिए तैयार करने में 8-10 साल लगते हैं. इस रूल से उत्तराधिकार की योजना बनाना मुश्किल हो जाएगा.’

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