वैश्विक महामारी कोरोना के संदर्भ में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को पुनः परिभाषित करने की जरूरत 

उदयपुर (Udaipur). इंफ्रास्ट्रक्चर विकास तथा आधुनिक तकनीकियों के माध्यम से आमजन के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने, आर्थिक संभावनाओं को  बढ़ाने के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को वैश्विक महामारी (Epidemic) कोरोना के संदर्भ में पुनः परिभाषित करने की जरूरत है. यह विचार रविवार (Sunday) को ” कोविड व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट  : उद्देश्यों व कार्यो का पुनः निर्धारण ” विषयक गोष्ठी में  रखे गए. आयोजन विश्व संस्था जी डब्लू पी की भारतीय इकाई इंडिया वाटर पार्टनरशिप के तत्वावधान में हुआ.
संवाद में विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ अनिल मेहता ने कहा कि कोविड जैसी महामारियां ही नही, स्थानीय स्तर पर होने वाली संक्रामक बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए  स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ” महामारी (Epidemic) प्रसार  रोकथाम व बचाव ” को सुनिश्चित करने वाला होना चाहिए. उन   समस्त आधुनिक डिजिटल तकनीकों व साधनों को स्थापित करना चाहिए जो भीड़भाड़ को नियंत्रित करती हो, सार्वजनिक स्थलों का पर्याप्त   वेंटिलेशन करती हो तथा फिजिकल डिस्टेंसिंग को बनाये  रखने में सहायक सिद्ध होती हो.
झील संरक्षण समिति के सचिव डॉ तेज राज़दान ने  स्मार्ट सिटी व पान सिटी के  आर्थिक रूप से गरीब समुदाय के लिए ऑटोमेटिक सेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीन की तरह ही निशुल्क मास्क वेंडिंग मशीनों को लगाए जाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट  का बड़ा हिस्सा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना में लगना चाहिए. ताकि स्थानीय स्तर पर मौसमी संक्रामक बीमारियों सहित वैश्विक महामारियों के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं आमजन को मिल सके.
इसी संदर्भ में राज्य के वन विभाग के अतिरिक्त प्रिंसिपल  चीफ कंजरवेटर व एच सी एम रीपा के अतिरिक्त निदेशक वेंकटेश शर्मा ने कहा कि  हर प्रमुख मार्ग पर सेनेटाइजर डिस्पेंसर उपलब्ध होना चाहिए. किसी क्षेत्र में किसी एक समय पर निर्धारित संख्या से ज्यादा लोग इक्कठे नही हो, इसके लिए आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस वाले तकनीकी गैजेट लगाने चाहिए. शर्मा ने कहा कि  सब्जी मंडी, किराना दुकानों को इस तरह व्यवस्थित करना चाहिए जिससे भीड़ कम हो तथा विक्रेता व ग्राहक के मध्य न्यूनतम सुरक्षित दूरी बनी रहे. स्मार्ट सिटी क्षेत्र के संकरे रास्तों को वन वे करने से भीड़ व ट्राफिक जाम कम हो सकेंगे.
झील विकास प्राधिकरण के सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र में हर सड़क पर छह फीट दूरी की मार्किंग होनी चाहिए. साथ ही पार्क,झील किनारों  अन्य जगह बैठने की बेंच इस प्रकार लगे कि लोगों के मध्य सुरक्षा  दूरी बनी रहे. सफाई कार्य को भी आधुनिक मशीनों से करवाना होगा ताकि प्रभावी सफाई हो, नियमित सेनेटाइजेशन हो तथा सफाई कर्मी के स्वास्थ्य को भी कोई नुकसान नही हो.
गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र के सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालयों व मूत्रालयों को नवीन रूप से डिज़ाइन करने की जरूरत है. ताकि इस्तेमाल करने वाले लोग संक्रमित नही हो. झीलों, बावड़ियों व हैंड पम्प की विशेष सुरक्षा जरूरी है. एफ़प्रो के पूर्व अधिकारी पल्लब  दत्ता व वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र मेहता ने कहा कि टेम्पो स्टैंड, बस स्टैंड शेल्टर को इस तरह बनाना चाहिए कि परिवहन साधनों में सुरक्षा दूरी बनी रहे. साथ ही एक स्टैंड पर अधिकतम टेम्पो की संख्या निर्धारित करनी चाहिए. इसकी पुख्ता पालना करने के लिए शेल्टर की डिज़ाइन में सुधार करने होंगे.
जल शक्ति मंत्रालय में सलाहकार जयदेव जोशी व युवा  कृषि अर्थशास्त्री दानिश अली ने कहा कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र में सुरक्षित रहते हुए समस्त  रोजगारकारी आर्थिक गतिविधियों  चलती रहे, इसके अनुरुप बाज़ारो को विकसित करना चाहिये. शिक्षाविद कुशल रावल  व सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ  दिगम्बर सिंह ने कहा कि स्मार्ट सिटी के स्कूलों, पूजा स्थलों में तकनीकी के प्रयोग से विद्यार्थियों व श्रद्धालुओ के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने वाली व्यवस्थाएं बनाई जा सकती.
इस अवसर पर  झील संरक्षण समिति,झील मित्र संस्थान व गाँधी मानव कल्याण सोसायटी से जुड़े झील प्रेमियों ने  पिछोला के अमरकुण्ड से झील पर तैरती पॉलिथीन, पानी शराब की बोतलें, वेपर्स,नारियल एवम घरेलू सामग्री को निकाला.झील सफाई पश्चात हनुमान घाट झील क्षेत्र से लगभग एक टन पत्थरों को बाहर निकाला.श्रमदान में द्रुपद सिंह चौहान,राम लाल,जल योद्धा कुशल रावल,कृष्णा कोष्टी,तेजशंकर पालीवाल व नन्द किशोर शर्मा ने भाग लिया.
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