स्पेसएक्स टेक्नॉलॉजीज के पास नहीं है लायसेंस!

ट्राई ने इसरो को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस पर रोक लगाने को कहा

नई दिल्ली (New Delhi) . स्पेसएक्स टेक्नॉलॉजीज को इंडिया की सैटेलाइट ब्रॉड-बैंड सर्विस के बिड के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हैं. इस कंपनी की स्थापना एलन मस्क द्वारा की गई ट्राई संस्था ने दावा किया हैं कि स्पेशएक्स के पास देश में ऐसी सर्विसेज़ को लॉन्च करने के लिए सरकार से लाइसेंस या ऑथराइज़ेशन नहीं है. अमेजन, हगेस, गुगल, माइक्रोसॉफ्ट और फेसबुक जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक उद्योग संस्थाटेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को लिखा है कि वे स्पेशएक्स को भारत में इसकी स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज की प्री-सेलिंग के बीटा संस्करण को बेचने से रोकने के लिए कहें.

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ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के अध्यक्ष टीवी रामचंद्रन ने कहा है कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, मौजूदा नीति और रेग्युलेटरी नोर्म्स का पालन करने के लिए इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया जाना चाहिए. ब्रॉडबैंड फ़ोरम के अनुसार, स्पेसएक्स-समर्थित स्टारलिंक के पास न तो भारत में अपना कोई ग्राउंड/अर्थ स्टेशन था, न ही दूरसंचार विभाग और इसरो द्वारा ऐसी (बीटा) सेवाएं प्रदान करने के लिए कोई सैटेलाइट फ्रिक्वेन्सी औथोंराइजेशन. इस लेटर को आधार बनाते हुए ट्राई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी.

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बता दे कि स्पेशएक्स ने भारत में अपनी सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सेवा के बीटा संस्करण का प्री-ऑर्डर बूकिंग शुरू कर दिया है जिसे आप डिपॉजिट अमाउंट (7,000 रुपये से अधिक) के साथ बूक कर सकते हैं. यह अमाउंट पूरी तरह से रिफंडेबल हैं. कंपनी, जो पहले से ही अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में इस तरह की सर्विसेज़ प्रदान कर रही है, को उम्मीद है कि 2022 में सैटेलाइट के माध्यम से भारतीय उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट कनेक्टिविटी के ऑफर शुरू हो जाएगी.

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कंपनी की वेबसाइट कहती है, “उपलब्धता सीमित होने के कारण पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सर्विस अवेलेबल होगी.” मालूम हो ‎कि एलन मस्क 100 एमबीपीएस सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस के माध्यम से तेजी से बढ़ते भारतीय टेलीकम्यूनिकेशन इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं इसलिए मस्क ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हे देश में सैटेलाइट बेस्ड ब्रॉडबैंड टेक्नालजी की अनुमति दे.

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