Wednesday , 16 October 2019
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रोहिणी नक्षत्र में 23 अगस्त को मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

भोपाल, 17 अगस्त (उदयपुर किरण). हिन्दू धर्म में भाद्रपद अष्टमी का विशेष महत्व है. इस दिन जगत के पालक भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में हुआ था. इस साल भी आगामी 23 अगस्त को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी.

ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील शर्मा के अनुसार आगामी 23 अगस्त को शुक्रवार के दिन सुबह अष्टमी तिथि शुरू होगी और इस दिन रात्रि 11.56 बजे रोहिणी नक्षत्र का शुभारंभ होगा. यानी जन्म अष्टमी के दिन मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में मंगलकारी योग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. पंडित शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी से डोल ग्यारस तक भगवान श्रीकृष्ण को बाल रूप में श्रद्धालुओं द्वारा पालने में झुलाया जाता है. जन्माष्टमी का उपवास करने से मनुष्य को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस व्रत को व्रत राज भी कहा जाता है. जन्माष्टामी के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को नए वस्त्र और आभूषण धारण कर माखन-मिश्री और मिष्ठान का भोग लगाया जाता है. जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत का पाठ अवश्य करना चाहिए. भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या भगवान शालिग्राम पर दूध दही शहद तीर्थ जल से अभिषेक कर नए वस्त्र एवं आभूषण धारण करवाना चाहिए.  मध्य रात्रि को भगवान की स्तुति कर आरती उतारना चाहिए.

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उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म वासुदेवजी व माता देवकी के गर्भ से आठवीं संतान के रूप में मथुरा कारावास गृह में हुआ था तथा भगवान का पालन पोषण गोकुल ग्राम में नंदबाबा और माता  यशोदा के यहां हुआ था, तभी से भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में जाना जाता है.

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