बैलिस्टिक मिसाइल के-4 का सफल परीक्षण, निशाने पर होगा पूरा पाक, आधा चीन


विशाखापट्टनम. भारतीय नौसेना की सामरिक शक्ति में इजाफा हुआ है. भारत ने पनडुब्बी से दागे जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के-4 का आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से एक और सफल परीक्षण किया है. एक के बाद एक दो सफल परीक्षण के बाद भारत ने किसी दुश्‍मन देश के परमाणु हमले के बाद अपनी जवाबी हमले की क्षमता में कई गुना की बढ़ोत्तरी कर ली है.

करीब 3500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम इस मिसाइल की जद में अब पूरा पाकिस्‍तान और आधा चीन आ गया है. न्‍यूक्लियर बम ले जाने में सक्षम के-4 मिसाइल स्‍वदेशी तकनीक से बनाई जा रही परमाणु पनडुब्‍बी अरिहंत में लगाई जाएगी. के-4 और ब्रह्मोस की जुगलबंदी से अब भारत अपने दुश्‍मनों को करारा जवाब देने में सक्षम हो गया है. इस सफल परीक्षण के बाद भारत ‘न्‍यूक्लियर ट्रायड’ की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है. वर्ष 1998 में परमाणु बमों का सफल परीक्षण करने के बाद भारत ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ की क्षमता हासिल करने पर काम कर रहा है.

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परमाणु पनडुब्बियां महीनों तक पानी के अंदर रहने में सक्षम हैं, इसकी वजह से ये दुश्‍मन के जासूसी सैटलाइट या निगरानी विमानों की पकड़ में ये नहीं आते हैं. दुश्‍मन को परमाणु पनडुब्बियों की सही स्थिति का अंदाजा नहीं होता है, इसलिए वह इन्‍हें आसानी से निशाना नहीं बना सकता है. ज्ञात हो कि भारत की पहली स्वदेश निर्मित न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिहंत को अगस्त 2016 में नेवी की सेवा में शामिल किया गया था. आईएनएस अरिहंत 83 मेगावॉट क्षमता वाले लाइट वॉटर रिएक्टर से चलती है और इसका ट्रायल दिसंबर 2014 से ही चल रहा था.

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इस पनडुब्‍बी पर अभी के-15 सबमरीन लॉन्‍च्‍ड बैलिस्टिक मिसाइल (एसएलबीएम) तैनात किया गया है जिसकी मारक क्षमता 750 किमी है. के-4 के सफल परीक्षण के बाद भारत ने अब 3500 किमी तक मार करने की क्षमता हासिल कर ली है. भारत अब विश्‍व के उन 6 देशों के क्‍लब में शामिल हो गया है जिनके पास जमीन, हवा और पानी के अंदर से परमाणु मिसाइल दागने में सक्षम हैं. के-4 के सफल परीक्षण के बाद अब भारत ने अब अपने दो सबसे बड़े दुश्‍मन देशों पाकिस्‍तान और चीन को निशाना बनाने की क्षमता हासिल कर ली है. के-4 की जद में पूरा पाकिस्‍तान और चीन के औद्योगिक इलाके आ गए हैं.

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