देश के दो बड़े औद्योगिक घरानों में नंबर 1 पर रहने की होड़; अंबानी-अडाणी में छिड़ी वर्चस्व की जंग, राजनीति पर भी होगा असर

मुंबई (Mumbai) . आर्थिक मंदी के इस दौर में भारत के 2 औद्योगिक घरानों में नंबर वन 1 पर रहने की होड़ लग गई है. वर्तमान में मुकेश अंबानी एशिया के नंबर वन और दुनिया के 12वें नंबर के बिजनेसमैन हैं. अंबानी के वर्चस्व को अडाणी ग्रुप के मालिक गौतम अडाणी कड़ी चुनौती दे रहे हैं. वर्तमान में अडाणी एशिया के दूसरे नंबर और दुनिया के 14वें नंबर के बिजनेसमैन हैं. अडाणी की 2 कंपनियां स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड होने वाली हैं. उनके लिस्टेड होते ही अडाणी नंबर वन की पोजीशन पर आ सकते हैं. मुकेश अंवानी नंबर 1 की हेसियत खोने तैयार नहीं हैं.

वर्तमान समय में अडाणी ग्रुप को केन्द्रीय सत्ता का भरपूर संरक्षण है. जैसा 2000 में अंबानी बंधुओं को प्रमोद महाजन और लालकृष्ण आडवाणी का संरक्षण प्राप्त था. वर्तमान मोदी सरकार का संरक्षण मिलने के कारण अडाणी ग्रुप का नेटवर्थ दिन दूना रात चौगुना (guna) बढ़ता जा रहा है. इससे संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही गौतम अडाणी रिलायंस समूह के मुकेश अंबानी को पछाड़कर एशिया के नंबर वन सबसे बड़े रहीस बन जाएंगे.

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अडाणी के नेटवर्थ में भारी वृद्धि

सरकार का संरक्षण होने के कारण गौतम अडाणी के कारोबार में लगातार जबरदस्त उछाल बना हुआ है. वर्तमान समय में गौतम अडाणी की नेटवर्थ 78 अरब डॉलर (Dollar) भारतीय मुद्रा में लगभग 5.69 लाख करोड़ रुपए है. वहीं मुकेश अंबानी की कुल नेटवर्थ 84 अरब डॉलर (Dollar) भारतीय मुद्रा में 6.13 लाख करोड़ रुपए है. पिछले 15 दिन में अडाणी की नेटवर्थ में तेज बढ़ोत्तरी हुई है. अडाणी की लिस्टेड 6 कंपनियों के शेयरों में तेज बढ़त देखी गई है. वहीं अडाणी 2 और कंपनियों को लिस्टेड करने जा रहे हैं. इससे उनका नेटवर्थ तेजी से उछाल मारेगा. सूत्रों का कहना है कि अडाणी के बढ़ते नेटवर्थ से मुकेश अंबानी का ताज गौतम अडाणी के पास जा सकता है.

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 दोनों घरानों में संघर्ष की स्थिति

गौतम अडाणी का नेटवर्थ लगातार बढ़ रहा है. उससे अंबानी के नेटवर्थ को कड़ी चुनौती मिल रही है. देशभर में कोरोना महामारी (Epidemic) के दौरान अंबानी के मुकाबले अडाणी की संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ है. कई जानकारों का मानना है कि एशिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन की लिस्ट में अडाणी जल्दी ही अंबानी को भी पीछे छोड़ सकते हैं. अडाणी की नेटवर्थ में इस साल में 45 अरब डॉलर (Dollar) की वृद्धि हुई है. जबकि मुकेश अंबानी की केवल 8 अरब डॉलर (Dollar) नेटवर्थ बढ़ी है. इस कारण देश के दोनों औद्योगिक घरानों में आंतरिक संघर्ष की स्थिति बनती जा रही है.

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औद्योगिक वार में कोई बड़ी घटना की आशंका

वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य को देखते हुए 2000 की याद आती है. जब तत्कालीन अटल सरकार ने रिलायंस को एक रुपए में सीडीएमए का लाइसेंस दिया था. जिससे रिलायंस कंपनी रातोंरात औद्योगिक पटल पर छा गई थी. रिलायंस कंपनी की उड़ान में भाजपा सरकार के जाने के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रमोद महाजन की हत्या (Murder) को लेकर उस समय आशंकाये व्यक्त की गई थी. औद्योगिक सत्ता की लड़ाई में अंबानी और अडाणी के कोल्ड बार को लेकर भी औद्योगिक हल्कों में अटकले का दौर शुरु हो गया है.

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