देवरे के भोपाजी बने प्रधान, 25 साल से जूते भी नहीं पहने बोले-मुझे सेवा-पूजा का फल मिला…अब जनसेवा की बारी

चित्‍तौड़गढ़. जिले के एसटी वर्ग के लिए आरक्षित बेगूं प्रधान की कुर्सी काटूंदा में माताजी के देवरे में सेवा-पूजा करने वाले भोपाजी नारू भील को मिली है. आस्था के चलते नारू पिछले 25 साल से जूते नहीं पहनते हैं. प्रधान पद का नामांकन दाखिल करने भी वे गुरुवार (Thursday) काे नंगे पांव ही पंचायत समिति सभागार पहुंचे. निर्विरोध चुने जाने पर रिटर्निंग अधिकारी जब उन्हें प्रमाणपत्र देने पहुंचे तो दंग रह गए. भाेपाजी नारू भील ने कहा कि वे माताजी की सेवा कर रहे हैं अब जनता की सेवा भी करेंगे.

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काटूंदा-जयनगर एसटी आरक्षित वार्ड 6 से निर्वाचित नारू भील मूलतः बलवंत नगर निवासी हैं. दो बेटे-बेटियों के पिता नारू िसर्फ साक्षर हैं. 60 वर्षीय नारू भील ने पहली बार चुनाव लड़ा है. उन्होंने कहा कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि देवरे में सेवा पूजा करते-करते वे प्रधान बनेंगे. 25 साल से जूते नहीं पहनने के पीछे उनकी कोई मन्नत नहीं है. सिर्फ सेवा-पूजा के चलते ही जूते नहीं पहनते हैं. बिना जूते पहने, सिर पर चूनर का साफा और सफेद मूंछों वाले भोपाजी की सादगी के लोग कायल हो गए. प्रधान बनने के बाद नारू बोले-मुझे माता की सेवा का फल मिला है. पूर्व विधायक सुरेश धाकड़ और भाजपा ने छोटे से कार्यकर्ता को मौका दिया है.

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