हिंद महासागर में क्वाड देशों के अभ्यास का अंतिम दिन

नई दिल्ली (New Delhi) . क्वाड सदस्य देशों के बीच बीते दो दिनों से हिंद महासागर में चल रहे सैन्य अभ्यास का बुधवार (Wednesday) को अंतिम दिन है. इससे पड़ोसी देश चीन को अब बेचैनी हो रही है. चीन की तरफ से इस सैन्य अभ्यास का लेकर जो टिप्पणी की गई है वो किसी भ सूरत (Surat) से सही नहीं कही जा सकती है.

दरअसल, चीन विभिन्न देशों के बीच सैन्य अभ्यास या सहयोग क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के अनुकूल होना चाहिए. चीन इतने पर ही नहीं रुका बल्कि वहां के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अगले सप्ताह होने वाले अमेरिकी-जापान शिखर सम्मेलन को लेकर जापान को आगाह भी किया है.

दरअसल, चीन नहीं चाहता है कि दोनों देशों के संबंध मजबूत हों या इसके लिए प्रयास किए जाएं. आपको बता दें कि हिंद महासागर में चल रहे क्वाड सदस्य देशों की नौसेना के सैन्य अभ्यास में अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के अलावा फ्रांस भी हिस्सा ले रहा है. ये अभ्यास सोमवार (Monday) से शुरू हुआ था. इस अभ्यास में फ्रांस का शामिल होना इस लिहाज से भी खास है क्योंकि भारत ने वहां से रफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को अंतिम रूप दिया. इस विमान के भारतीय वायु सेना में शामिल होने से वायु सेना की ताकत काफी बढ़ गई है. कुछ दिन पहले ही फ्रांस ने दो और रफेल विमान भारत को सौंपे थे. इस अभ्यास में फ्रांस का शामिल होना कहीं न कहीं दोनों देशों के मजबूत होते गठजोड़ को भी दिखाता है

. भारतीय नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक ये अभ्यास मित्र देशों की सेनाओं के बीच बेहतर और उच्चस्तरीय तालमेल स्थापित करेगा. साथ ही ये क्वाड के सदस्य देशों के साझा मूल्यों को भी दर्शाता है. इस अभ्यास के दौरान भारतीय नौसेना के जहाज सतपुड़ा, किल्टन और लॉन्गरेंज मेरिटाइम पेट्रोल (Petrol) एयरक्राफ्ट पी-8I हिस्सा ले रहा है. गौरतलब है कि चीन दक्षिण चीन सागर पर अपना कब्जा बताता आया है. इस इलाके पर वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस, ब्रूनई, ताइवान भी अपना हक जमाता है. इस पूरे इलाके को लेकर चीन काफी आक्रामक है और इसको लेकर अमेरिका से उसका आमना-सामना भी हुआ है. दोनों देशों के बीच कई बार इसको लेकर तीखी बयानबाजी भी सामने आई है.

चीन को लगता है कि क्वाड को केवल उसके कदमों को रोकने के लिए ही आगे बढ़ाया जा रहा है. हिंद महासागर में चल रहे अभ्यास को लेकर चीन का बयान भी उसके इसी डर को दर्शा रहा है. हालांकि भारत इस अभ्यास को अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए जरूरी मानता है. दक्षिण चीन सागर की ही बात करें तो वहां पर उसने कुछ द्वीपों पर अपनी सेना का बेस कैंप तक बनाया है. कई अन्य द्वीपों पर भी उसका निर्माण कार्य चल रहा है. वो लगातार इस क्षेत्र में आने वाले अन्य देशों के जहाजों को धमकाता रहता है.

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