Wednesday , 16 October 2019
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रहस्‍यमय गुफा जिसमें दबा है हजारों टन सोना, अगर मिल जाए तो भारत वापस बन सकता है सोने की चिड़िया

  दोस्‍तों हम आज एक ऐसी गुफा के बारे में बताने जा रहे है जिसमें दबा है हजारों हजार टन सोना. अगर मिल जाए तो भारत बन सकता है सोने की चिड़िया. गुफा के मुख्य द्वार पर है एक बड़ा पत्थर अंग्रेजों ने इसे तोपों से उड़ाने का असफल प्रयास किया हजारों सालों से दबा पड़ा है खजाना. भगवान बुध ने यही पर ही पर बौद्ध धर्म का पहला उपदेश दिया था.

ढाई हजार साल पुराने राजा का है यह खजाना

बिहार के राजगीर में स्थित है जहां मगध के सम्राट राजा बिंबिसार और उसके वंशजों का खजाना दबाया हुआ है. अब आपको यह तो पता होगा कि पुराने जमाने में कोई अलमारी तिजोरी तो होती नहीं थी तो लोग खजाने को जमीन गुफा मंदिर देखाने आदि में छुपा कर रखते थे. यहां के स्थानीय लोग और अंग्रेजी दस्तावेज बताते हैं कि इस गुफा में कई हजार टन सोना दबा है. अगर वह मिल जाए तो भारत पूरी दुनिया में सोने के मामले में नंबर वन बन सकता है.

इस गुफा का नाम है सोन भंडार

अंग्रेजों के जमाने में अंग्रेजों ने खजाने को लूट कर इंग्‍लैंड ले जाने के उद्देश्य से इस खजाने तक पहुंचने का एक मैप तैयार करवाया. इस गुफा के बीचो-बीच जिसमें हजारों हजार टन सोना पर उस कमरे तक पहुंचना बिल्कुल असंभव है क्योंकि गुफा के अंदर हम प्रवेश तक नहीं कर सकते. क्योंकि इस गुफा के मुख्य द्वार पर एक विशाल बड़ा पत्थर रखा हुआ है. हजारों साल से यह पत्थर ऐसे ही पड़ा है जिससे मानो यह पत्थर इस गुफा से चिपक सा गया है और अगर हम पत्थर हटा के अंदर घुस भी गए तो अंदर का रास्ता बेहद संकरा और तंग है जिसे मात्र एक ही आदमी एक समय में अंदर घुस सकता है. गुफा के मुख्य खजाने वाले कमरे पर भी एक बड़ा पत्थर लगाया गया होगा और अगर गुफा में एक समय में एक ही आदमी को सकेगा तो खजाने वाले कमरे का पत्थर बिना सेना के कैसे हटाया जा सकेगा.

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जब अंग्रेज सभी कोशिशें करने के बाद हार गए तो अंग्रेजों ने इस गुफा को तोप से उड़ाने का फैसला किया. इस गुफा को कुछ नहीं हुआ अंत में असफल होकर लौट गए. अंग्रेजों ने इस गुफा पर हजारों गाेले बरसाए आज भी अंग्रेजों के निशान देख सकते हैं. अब एक बात तो साफ है अंग्रेजों ने तक पहुंचने के लिए बनवाया इस गुफा के अंदर कुछ तो है बाकी अपना कीमती वक्त जाया करें.

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इस गुफा के बाहर लिपि में कुछ लिखा हुआ है जिससे अंदाजा लगाया जाता है किस लिपि में खजाने तक पहुंचने के लिखे हुए हैं दुर्भाग्यवश इस लिपि को कोई नहीं पढ़ सकता. अंग्रेजों ने भी खूब प्रयास करें कि कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाए तो इस पर कोई भी ऐसा विद्वान नहीं मिला जो इस गुफा के बारे में इतिहासकारों का कहना है कि इस गुफा को मौर्य शासक ने बनवाया था. इस गुफा को बनाने में राजगीर के उस जमाने के पहाड़ को काटकर अपने खजाने को छुपाने के लिए यह गुफा बनवाई थी. इस गुफा में दो बड़े कमरे बनवाए गए रखने के लिए तथा दूसरे कमरे में सैनिक बैठकर खजाने की रक्षा करते थे. इस गुफा को सोना रखने के लिए बनवाया गया था जिस गुफा का नाम ही सोन भंडार गुफा पड़ गया अब आपके मन में सवाल उठेगा कि यह खजाना गुफा में ही क्यों छुपाया गया.

मगध के सम्राट बेटा अजातशत्रु जो चाहता था कि उसके पिता की सारी दौलत और खजाना उसे मिल जाए. इस बात की भनक लग गई और अपने ही पिता के पास जेल करवा दिया आज भी वहां मौजूद है और आप उसे देख सकते हैं. अपने जीवन में कभी भी इस गुफा का खजाना नहीं लूट पाया क्योंकि उससे यह गुफा कभी खुली ही नहीं थी. अब आप खुद सोचिए क्या भारत सरकार इतने बड़े खजाने को खोजने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति की खोज नहीं कर सकती जो गुफा के बाहर लिखे गुप्त कोड को पढ़ सकें. अगर भारत सरकार पहल करें इसको पढ़ने में कोई सफल हो जाए तो ना सिर्फ मात्र बिहार बल्कि पूरे भारत की गरीबी मिट सकती है.

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आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं जिसमें हजारों तरह के अस्त्र-शस्त्र भयंकर तक क्यों तकनीकों की सहायता से इस गुफा के मुख्य द्वार को नहीं खोला जा सकता क्या ? भारत सरकार को यह नहीं करना चाहिए कि भारत के इतिहास में मगध के साम्राज्य के बारे में खोज की जाए. क्या पता उसी में इस गुफा को खोलने तथा खजाने तक पहुंचने में मदद मिल जाए.

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