Saturday , 23 October 2021

शुरु हुआ खौफनाक सजा का दौर : तालिबान ने अपहरण के आरोपी के शव को चौराहे पर क्रेन से लटकाया

काबुल . अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात के ऐलान के बाद तालिबान और ज्यादा खूंखार हो गया है. तालिबान ने हेरात शहर के मुख्य चौक पर एक शख्स के शव को फांसी पर लटका दिया. स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ तालिबान लड़ाके अपहरण के आरोपी चार लोगों के शवों को घसीटते हुए लाए और इनमें से एक शव के गले में रस्सी बांधी और उसे घंटों क्रेन से लटकाए रहे. अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से ऐसी सजा दिए जाने का वीभत्स दृश्य आज से लगभग बीस साल पहले तालिबान के राज में आम हुआ करता था.

बताया जाता है कि तीन और लोगों के शवों को तालिबान लड़ाकों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में ले जाककर सार्वजनिक रूप से इसी तरह से फांसी दी है. तालिबान के इस हैवानियत को देख पूरी दुनिया सकते में है. हेरात चौक के किनारे एक फार्मेसी चलाने वाले वजीर अहमद के हवाले से बताया कि तालिबान लड़ाके चार शवों को मुख्य चौराहे पर लेकर आए थे. इसमें से एक को उन्होंने चौक पर फांसी पर लटका दिया, जबकि बाकी तीन को शहर के अलग-अलग इलाकों में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लेकर गए. तालिबान ने चौक पर ऐलान किया कि ये चारों एक अपहरण में शामिल थे, इन्हें पुलिस (Police) ने गोलियों से भून दिया.

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हेरात में तालिबान के नियुक्त जिला पुलिस (Police) प्रमुख जियाउलहक जलाली ने बाद में कहा कि तालिबान के सदस्यों ने एक पिता और पुत्र को बचाया, जिन्हें चार अपहरणकर्ताओं ने बंदूक की नोक पर अपहरण कर लिया था. इस दौरान अपहरणकर्ताओं ने फायरिंग भी की थी. उन्होंने कहा कि अपहरणकर्ताओं ने एक तालिबान लड़ाके और एक आम नागरिक को घायल कर दिया था. बाद में सभी अपहरणकर्ता मुठभेड़ में मारे गए.

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तालिबान के संस्थापकों में से एक और इस्लामी कानून के जानकार मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने कहा था कि जल्द ही हम पुराने सरकार में दी जाने वाली सजाओं को लागू करेंगे. इसमें लोगों के हाथों को काटने से लेकर फांसी देने तक की सजा शामिल हैं. उन्होंने कहा इस बार ऐसी सजाएं सार्वजनिक रूप से नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे दी जाएंगी. मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने फांसी की सजा पर तालिबान की नाराजगी वाले दावों को खारिज कर दिया. उन्होंने अफगानिस्तान की नई सरकार के खिलाफ किसी भी प्रकार की साजिश रचने को लेकर दुनिया को चेतावनी भी दी है. तालिबान की पिछली सरकार में फांसी की सजा आम तौर पर किसी स्टेडियम में दी जाती थी. जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ पहुंचती थी.

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