लोगों मे चर्चा का विषय है यह सवाल कि मेंटेना के भुगतान में किस किस का हुआ भला

बैतूल /नवल-वर्मा. जिस तरह से गढ़ा डैम में मेंटना पर बेहिसाब मेहबानी हुई है उसको लेकर हर तरफ़ चर्चाएँ चल रही है. इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह एडवांस भुगतान में ऊपर लेवल पर क्या सेटिंग है? लोकल लेवल पर अफसरों से क्या सांठगांठ है! जल संसाधन विभाग के लिए पूर्व में जलाशय बना चुके एक ठेकेदार का कहना है कि भुगतान में चेक कटते ही हर निर्माण विभाग में चढ़ावा तो लगता ही है फिर जल संसाधन के अफसर कैसे अछूते रह सकते हैं. सबकुछ परम्परा के अनुसार तयशुदा है. एडवांस पेमेंट में भी हुआ ही होगा पर यह जांच का विषय है. मेंटेना पर जो ईडी के छापे पड़े हैं उसमें अब हवाला का भी जिक्र आ रहा. भोपाल (Bhopal) के एक पत्रकार हरी यादव का कहना है कि यह बड़ा खेल है जिसमें बड़े बड़े लोगों के नाम लिए जा रहे है.

  सर्द हवाओं से बढने लगी प्रदेश में ठिठुरन

– गढ़ा जलाशय के भविष्य को लेकर किसान चिंतित…

जिस तरह से ई-टेन्डर विवाद में ठेकेदार उलझ गया है. उस पर ई ओ डब्ल्यू से लेकर ई ड़ी तक की जांच बैठ गई है और उस पर उसे विभाग द्वारा मोटी रकम दे दी गई है. उससे गढा जलाशय बनाओ समिति से जुड़े किसान डैम के भविष्य को लेकर चिंतित है. बोरगांव के पर्वत घोटे का कहना है मामले में अफसर कोई जवाब नहीं दे रहे हैं इसलिए चिंता बढ़ रही है. उनका आरोप है कि इन हालात के लिए वह जनप्रतिनिधि भी जिम्मेदार हैं जिसने अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए डैम की जगह बैराज जैसा बोगस खेल ईजाद करवाया था. उसे उनके इलाके के लोग कभी माफ नहीं करेंगे.

Please share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *