कोरोना से जीतने हो सकती है बूस्टर डोज की जरूरत, इस बात पर वैज्ञानिकों में भी बन रही आम राय


नई दिल्ली (New Delhi) . क्या कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज की जरूरत है. इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि हमारा इम्युन सिस्टम कितने लंबे समय तक रिस्पॉन्स करता है. साथ ही वायरस किस तरह से अपना रूप बदलता है. हालांकि, अब इस बात पर आम राय बनने लगी है कि हमें बूस्टर डोज की जरूरत हो सकती है.

हमारे इम्युन सिस्टम में एक प्रकार का वाइट ब्लड सेल होता है जिसे बी सेल्स कहते हैं. यह टी सेल (हमारे इम्युन सिस्टम का एक और सेल) की मदद से एंटीबॉडी प्रोड्यूस करते हैं. ये वायरस से बचाव के लिए मैक्रोफेजेस तैयार करते हैं. इसे फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस कहा जाता है. बी सेल्स बैक्टीरिया और वायरस की सतह एंटीजन को पहचान सकती हैं. एंटीजन वो बाहरी पदार्थ है जो कि हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडी पैदा करने के लिए एक्टिवेट करता है. सीनियर माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रो. विजय एस का कहना है कि यदि कुछ वायरस फिर से हमला करते हैं तो इस स्थिति में मेमरी बी और टी सेल्स इम्युन सिस्टम को फिर से रिएक्टिवेट करते हैं.

  सेवा में आने के बाद जो भी फैसले लें, उनमें देश हित सर्वोपरि होना चाहिए : मोदी

पिछले महीने वैक्सीन निर्माता कंपनी फाइजर कंपनी के सीईओ अलबर्ट बोरला ने कहा था कि पूरी तरह से वैक्सीनेशन के बाद लोगों को कोरोना वैक्सीन के बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है. कुछ सप्ताह पहले ही देश में भारत बायोटेक को एंटी कोरोना वैक्सीन के तीसरे बूस्टर डोज के टेस्ट की अनुमति मिली है. इसका मतलब है कि क्या हमें बूस्टर डोज की जरूरत है. इस बारे में वेटरन वायरोलॉजिस्ट डॉ. टी जैकब हां में जवाब देते हैं. जैकब ने कहा कि बूस्टर डोज के जरूरत की उम्मीद है लेकिन यह एक साल या कितने समय बाद लगेगी इस बारे में अभी कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है. इसकी वजह है कि यह महामारी (Epidemic) अभी महज एक साल ही पुरानी है.

  ‘ओमकारा’ के ‎हिट होने में ‘बीड़ी जलाई ले’ गाने का बड़ा हाथ

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने यह पाया था कि फाइजर-बायोएनटेक और ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन बी.1.617.2 के खिलाफ क्रमशः 88फीसदी और 60 फीसदी तक प्रभावी है.स्टैनफर्ड में चिल्ड्रेन हेल्थ के संक्रामक रोग के एक्सपर्ट ग्रेस ली ने कहा कि वायरस के नए वैरिएंट्स को टाला नहीं जा सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि वे कितने प्रभावशाली साबित हो सकते हैं. लगातार कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं. एंटी कोरोना वैक्सीन को लेकर समय-समय पर नई स्टडी भी आ रही हैं. इसमें बताया जा रहा है कि कौन सी वैक्सीन किस वैरिएंट्स पर कितनी प्रभावी है.

न्‍यूज अच्‍छी लगी हो तो कृपया शेयर जरूर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *