महाराणा शंभु सिंह की आज 173वीं जयन्ती


उदयपुर (Udaipur). मेवाड़ के 71वें एकलिंग दीवान महाराणा शंभु सिंह जी (राज्यकाल 1861-1874 ई.स.) का जन्म पौष कृष्ण एकम, विक्रम संवत 1904 को हुआ था. आज महाराणा शंभुसिंह जी की 173वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन उदयपुर (Udaipur) की और से पूजा-अर्चना रखी गई है.

13 अक्टूबर 1861 को महाराणा स्वरूप सिंह जी ने कुंवर शंभुसिंह को गोद लिया. महाराणा शंभुसिंह जी ने 17 नवम्बर 1861 ई. में छोटी उम्र में ही मेवाड़ का राज्यकार्य संभाला. युवा महाराणा के मार्गदर्शन हेतु ब्रिटिश राजनीतिक एजेन्ट आर.एल. टेलर को नियुक्त किया गया था. महाराणा ने अपने शासनकाल में कई नये नियम और कार्यालय स्थापित कर प्रशानिक कार्यों को मजबूती प्रदान की. इस हेतु महाराणा ने 23 दिसम्बर 1869 को ‘महकमा खास’ नाम की एक कचहरी की स्थापना की थी. जनता में सुशासन के लिये उन्होंने दीवानी और फौजदारी अदालतों की भी स्थापित की थी.

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प्रजा के बेहतर स्वास्थ्य के लिये चिकित्सा, शिक्षा के साथ डाक सेवाओं को भी आरम्भ किया गया. समय-समय पर चिकित्सा के लिए स्वास्थ्य केन्द्र खोले गये, जेल और पुलिस (Police) व्यवस्था में सुधार किया गया, नगर में पुलिस (Police) की गस्त बढ़ा दी गई, मन्दिरों की व्यवस्था के लिए देवस्थान विभाग खोला गया और इनसे प्राप्त आय का उपयोग बाढ़, अकाल आदि नैसर्गिक आपदाओं के समय जनता की सहायता के लिए रखा गया. उनके प्रजा हितेषी कार्यों एवं राज्य के सुशासन के लिये ब्रिटिश सरकार की और से महाराणा को जी.सी.एस.आई नामक खिताब से नवाजा गया.

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महाराणा शंभुसिंह ने मेवाड़ में आधुनिक शिक्षा में बहुत रूचि ली थी. अपने व अपने गुरु पंडित रत्नेश्वर प्रसाद के नाम से सन् 1863 में पहला राजकीय विद्यालय ‘शंभुरत्न पाठशाला’ की उदयपुर (Udaipur) में स्थापना की. महाराणा ने 1866 में दो महिला शिक्षिकाओं को नियुक्त कर बालिका वि़द्यालय को भी स्थापित किया. 1872 में भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में दो स्कूल की स्थापना की गई. महाराणा शंभु सिंह जी द्वारा 1862 में पहला राज्य औषधालय उदयपुर (Udaipur) में खोला गया. 1864 में रोगियों के लिए ठहरने हेतु सुविधा प्रदान की गई. 1869-70 में आम जनता के लिए खेरवाड़ा में एक छोटा अस्पताल खोला गया. इस अस्पताल के रख-रखाव के लिये महाराणा की और से मासिक अनुदान दिया जाता था.

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महाराणा शंभुसिंह जी के निर्माण कार्यों में जगनिवास का शंभु प्रकाश महल, शंभुरत्न पाठशाला, के साथ ही उदयपुर (Udaipur)-देसूरी, नीमच-नसीराबाद, उदयपुर (Udaipur)-खेरवाड़ा और उदयपुर (Udaipur) से चित्तौड़गढ़ तक सड़कों का निर्माण भी करवाया तथा कई जीर्णोद्धार के लिए उन्होंने अनुदान भी दिया. महाराणा के शासन काल में उनकी माँ ने जगदीश मन्दिर के पास गोकुल चन्द्रमा मन्दिर का निर्माण भी करवाया.

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