केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने किया इशारा, भारत में कोरोना की वैक्‍सीन उपलब्‍ध होने पर प्राथमिकता हेल्‍थ वर्कर्स को


लंदन. कोरोना संकट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. बीमारी ने अबतक पूरी दुनिया में लाखों लोगों की जान ले ली है. इस बीच भारत में कोरोना की वैक्‍सीन उपलब्‍ध होने के बाद सबसे पहले किसे मिलनी चाहिए? इस बात पर मोदी सरकार (Government) के भीतर भी चर्चा चल रही है. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि इस बारे में कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है. मगर उन्‍होंने इशारा जरूर कर दिया कि प्राथमिकता हेल्‍थ वर्कर्स को मिल सकती है. ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी और अस्‍त्राजेनेका की वैक्‍सीन बंदरों को कोरोना संक्रमण से बचाने में कामयाब रही है. इस बीच, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को अस्‍त्राजेनेका वैक्सीन की फेज II और III के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दे दी है.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की लिस्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में कोरोना की 165 वैक्सीन पर रिसर्च हो रहा है. हो सकता है वैक्सीन रिसर्च की संख्या इससे भी ज्यादा हो और विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने इस लिस्ट भी नहीं किया हो. जिन वैक्सीन को यहां लिस्ट किया गया है, वह कम से कम प्री क्लीनिकल ट्रायल फेज में पहुंच चुकी है. कुछ फाइनल स्टेज में है और उसका मानवों पर ट्रायल हो रहा है. रूस की दवा कंपनी ने कुछ सप्ताह में कोरोना वैक्सीन को शुरू करने का दावा कर दिया है. कई और कंपनियां वैक्सीन का जानवरों पर वैक्सीन का ट्रायल कर रही है. ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्यिनुजाइशन (जीएवीआई) ने भारत की कई कंपनियों से वैक्सीन उत्पादन को लेकर बातचीत कर रही है. जीएवीआई के मुख्य कार्यकारी सेठ बार्कले ने बताया कि कोविड-19 (Covid-19) वैक्सीन ग्लोबल एक्सेस के साझेदार भारतीय कंपनियों से मिल चुके हैं.

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इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि अगर भारत कोवैक्स फैसिलिटी संग जुड़ जाता है,तब भारत को कोरोना वैक्सीन के लिए किसी कंपनी के साथ द्विपक्षीय समझौता करने की जरूरत नहीं है. ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन जहां फेज 3 ट्रायल से गुजर रही है, वहीं जानसन एंड जानसन की वैक्‍सीन फेज 1 और 2 में है. इससे पहले, मॉडर्ना की वैक्‍सीन के बंदरों पर ट्रायल के नतीजे भी शानदार रहे थे. यानी अबतक कुल चार वैक्‍सीन ऐसी रही हैं, जिन्‍होंने बंदरों में पूरी तरह कोरोना संक्रमण को रोकने में कामयाबी हुई है. दुनिया के कई अमीर देश कोरोना वैक्सीन बना रही कंपनियों के साथ सीधे करार कर रहे हैं. अमेरिका ने 1 अरब कोरोना वैक्सीन के डोज का करार ऐसी ही 6 कंपनियों से कर लिया है.

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