वन धन विकास योजनाः आंध्र प्रदेश की सफलता गाथा

नई दिल्ली (New Delhi) . जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत ट्राईफेड ने जनजातीय आबादी की आजीविका सुधारने में मदद देने के लिए अनेक कार्यक्रमों को लागू किया है. खासकर पिछले वर्ष कोविड महामारी (Epidemic) से प्रभावित जनजातीय लोगों की मदद के लिए. विभिन्न कार्यक्रमों में वन धन जनजातीय स्टार्टअप तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य और मूल्य संवर्धन करके छोटे वन उत्पाद की मार्केटिंग व्यवस्था (एमएफपी) प्रमुख है. एमएफपी योजना के अंतर्गत उत्पाद एकत्रित करने वालों को न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया जाता है और जनजातीय समूहों और कलस्टरों के माध्यम से मूल्यवर्धन और मार्केटिंग की जाती है. पूरे देश में इन कार्यक्रमों को व्यापक रूप से स्वीकार किया है.

खासर वन धन जनजातीय स्टार्टअप कार्यक्रम काफी सफल रहा है. आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh)वन धन योजना से जनजातीय लोगों को लाभ देने वाला बेहतरीन उदाहरण है. आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh)के 13 जिलों में कुल जनजातीय आबादी 59,18,073 है. इन 13 जिलों में से 7 जिले वन धन विकास केन्द्र (वीडीवीके) द्वारा कवर किए जाएंगे.

आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh)में कुल 263 वीडीवीके स्थापित किए जा रहे हैं, जिसमें से इस वित्त वर्ष के लिए 188 वीडीवीके को मंजूरी दी है. इनमें से 49 में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं और राज्य में 7 वन धन विकास केंद्र काम कर रहे हैं. इन केंद्रों से राज्य के 78,900 जनजातीय उद्यमियों को लाभ होगा. विशाखापत्तनम जिले में जिला क्रियान्वयन एजेंसी/क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में आईटीडीए पाडेरू काम कर रहा है और 39 अड्डापत्ता प्लेट हाइड्रॉलिक मशीनें स्थापित की गई हैं, 390 सिलाई मशीनें खरीदी गई हैं और स्वीकृत 54 वीडीवीके के लिए 40 समकोणीय आकार की इमली बनाने की हाइड्रॉलिक मशीनें लगाई गई हैं.

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