क्यो हो रही मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री में परंपराओं के नाम जुबानी जंग

जयपुर. कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में प्रदेश की सरकार बनाने में कामयाब तो हो गई पर इस कामयाबी के बाद पार्टी में दो गुट काम करने लगे हालांकि यह कहा जा रहा है राज्य से लेकर दिल्ली कांग्रेस में विचारो की मतभिन्नता किसी भी नेता में नहीं है और ना नेतृत्व में है.

राजस्थान में उक्त कथन से हटकर सत्ताधारी पार्टी में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री (प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट) के विचारो में मतभिन्नता संस्कृति और परंपरा के बीच बयानबाजी में साफ हो रही है. दोनो नेताओं की बयानबाजी से जाहिर होता है कि उपमुख्यमंत्री के विचारो से सरकार काम नहीं कर रही है मीडिया में पिछले दिनों कोटा के जेकेलोन अस्पताल में हुई बच्चो की मौत की घटना सुखिर्या बनी जिस पर सरकार के चिकित्सा विभाग ने अपनी गलती स्वीकारी पर उसके बाद मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले एक बयान देकर कहा था कि छोटे बच्चो की मौत पर उनके घर जाने का कोई तुक नहीं होता क्योंकि उनके परिवार में दुख का माहौल होता है.

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ज्ञात रहे कि सचिन पायलट ने भी जेकेलोन अस्पताल का दौरा कर सरकार को कहा था कि अगर गलती है तो स्वीकार करने में कोई हर्ज नही मुख्यमंत्री के जवाब में पायलट ने फिर एक बार कहा कि अगर गलत परंपरायें तोडने की बात हो रही है तो नवजात शिशुओं की मृत्यु पर आंसू पोछने ना जाने की परंपरा क्यों नहीं तोडनी चाहिए पायलट के अनुसार नवजाताओं की अकाल मृत्यु पर उनके माता पिता के आंसू पोछने जाते है ना की परंपरा का निर्वाहन करने.

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मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की परंपराओं के नाम एक दूसरे पर की जा रही बयानबाजी से यही कहा जा सकता है कि साल पीछे जब प्रदेश की सरकार गठन के वक्त मुख्यमंत्री बनाने की बात शुरू हुई तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पार्टी आलाकमान और प्रदेश के चुने हुए विधायकों की रजामंदी से सत्ता की कमान सौपी होगी पर लगता है तब शुरू हुई मुख्यमंत्री की रेंस बयानबाजी का कारण तो नहीं बन रही है.

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