Wednesday , 29 September 2021

शब्द सदियों का सफर तय करते हैं : डॉ. गायत्री तिवारी

उदयपुर (Udaipur). ख्यातनाम लेखिका डॉ. सरोजिनी प्रीतम द्वारा लिखित ये शब्द आयोजन सचिव डॉ. गायत्री तिवारी ने महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,उदयपुर (Udaipur) के संघटक सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय द्वारा  आयोजित, अगस्त 2021 से जुलाई 2022 तक माह के प्रत्येक दूसरे शनिवार (Saturday) को वर्षपर्यंत आयोजित की जाने वाले जीवन कौशल केंद्रित कार्यक्रम ” हँसते हँसते कट जाएँ रस्ते “विषयक सत्र श्रृंखला के द्वितीय सत्र “बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी ” में सभी का स्वागत करते हुए कहे.

आयोजन की सराहना करते हुए अधिष्ठाता,सामुदायिक एवम व्यवहारिक विज्ञान महाविद्यालय,डॉ. मीनू श्रीवास्तव ने कहा की  की वर्तमान में महामारी (Epidemic) के चलते कमोबेश हर व्यक्ति   उदासी, भय, अवसाद, चिंता, व्यापक चिंताओं, नकारात्मक विचारों, सामाजिक अलगाव, वित्तीय असुरक्षा की भावना के चलते परेशानी महसूस कर रहा है. परिणाम स्वरुप न केवल उसकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है अपितु परिवार,समुदाय और कार्यस्थल  पर भी स्वयं की क्षमताओं के अनुरूप कार्य कर पाने में पूर्णतया असफल महसूस कर रहा है. आपने बताया की कार्यक्रम के  उद्देश्य इस प्रतिकूल परिस्थिति के कारण अपरिहार्य अवकाश के समय का उपयोगी तरीके से उपयोग करना,,महामारी (Epidemic) की स्थिति के दौरान सकारात्मकता पैदा करना, जीवन काल के परिप्रेक्ष्य में पारिवारिक मूल्यों जैसे सहानुभूति, साझाकरण, देखभाल आदि को फिर से जीवंत करना है ताकि  अगली पीढ़ी के लिए जीवन कौशल का अनुभव बैंक (Bank) तैयार हो सके. सत्र के दौरान सभी ने अपने अनुभव साझा किये और नयी पीढ़ी द्वारा पूछी गई विषय आधारित संकाओं का समाधान किया.

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अंत में समापन टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए डॉ गायत्री तिवारी ने कहा की पूरे वर्ष चलाया जाने वाला ये कार्यक्रम निश्चय ही निसंदेह मनोसामाजिक दृष्टि  से मनोरंजन,शिक्षा और ज्ञान की त्रिवेणी द्वारा सामाजिक खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करेगा. आप ने कहा की बात करने से ही बात बनती है और बिगड़ती भी है. बात करना भी एक कला है. प्रतिभागियों द्वारा प्रतुत विचारों के निष्कर्षतः ये कहा जा सकता है की बातचीत में संयम के साथ साथ समानुभूति भी अनिवार्य है. क्या ?कब?कैसे ?क्यों ?कितना ?कहना है ?यदि ये कौशल विकसित हो जाए तो समाज के अधिकांशतः मनमुटाव बचाये जा सकते हैं,रिश्तों को सहेजा जा सकता है.

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सह संयोजिका डॉ. सुमित्रा मीणा ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ ही बताया की प्रतिभागियों में उदयपुर (Udaipur) के अलावा जयपुर,बीकानेर,कोटा (kota),जोधपुर (Jodhpur) ,ब्यावर,करौली (Karauli) ,देहरादून (Dehradun) ,दिल्ली,डूंगरपुर, राजकोट (Rajkot) , बांसवाड़ा,जम्मू (Jammu) कश्मीर के लोग शामिल हैं. आयोजन समिति में डॉ. हेमू राठौड़,एसोसिएट प्रोफेसर एवम विभागाध्यक्ष,संसाधन प्रबंधन व् उपभोक्ता विज्ञान,डॉ. स्नेहा जैन,श्रीमती रेखा राठौड़ और सु विशाखा  त्यागी हैं. इस अवसर पर डॉ कुमुदिनी चांवरिया,डॉ सुमन सिंह,डॉ वीणा चतुर्वेदी,श्रीमती प्रतिभा,डॉ प्रज्ञा दशोरा, कृष्ण बलदेव सिंह,श्रीमती अनीता साधवानी,सु प्रियंका नगर,श्रीमती प्रीती  लड्ढा  की सक्रीय भागीदारी रही.

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