महाकाल दरबार में भक्तों की भारी भीड़, भस्म आरती का दिव्य दर्शन

उज्जैन, 23 मार्च: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर, उज्जैन के बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा. श्रद्धालु बाबा की झलक पाने के लिए रविवार रात से लंबी कतारों में खड़े थे. परंपरा के अनुसार, बाबा महाकाल को जगाने के लिए सोमवार सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोले गए.

सुबह-सुबह, कई श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए. उन्होंने भगवान के दर्शन किए और पवित्र पूजा विधियों को देखा. यह आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा का हिस्सा मानी जाती है. भक्तों ने श्रद्धा से भगवान के दर्शन किए और आरती के दौरान पूजा विधि को ध्यान से देखा. यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा करवाई जाती है.

इस आरती में बाबा निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं. सुबह 3:30 से 4:00 बजे के बीच मंदिर के पट खुलते हैं और गर्भगृह में पूजा शुरू होती है. इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था. अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई.

इसके बाद बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया. महाकाल को चंदन से सजाया गया, माथे पर चंद्रमा रखा गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला अर्पित की गई. भक्त बाबा के अद्भुत श्रृंगार को देखकर खुशी से गदगद दिखे. इसके बाद महाकाल की कपूर आरती होती है और फिर उन्हें भोग लगाया जाता है. हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है.

इस पावन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से इस अलौकिक क्षण के दर्शन किए. संपूर्ण मंदिर परिसर जयकारों से गूंजता रहा और वातावरण शिवमय हो गया. लगभग दो घंटे चली इस आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और प्रभु का शृंगार साथ-साथ चलता रहा.

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