
इंदौर, 19 मार्च: मध्य प्रदेश में जल संरक्षण के लिए लगातार तीसरे वर्ष गुड़ी पड़वा पर जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की गई है. यह अभियान 139 दिनों तक चलेगा, जो गंगा दशहरा तक जारी रहेगा.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर के इस्कॉन मंदिर में आयोजित इस अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में कहा कि यह अभियान हमारी सनातन संस्कृति की पवित्र धारा का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि जल की महत्ता ऐसी है कि इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश नदियों का मायका है, जहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं. मां नर्मदा के पवित्र जल से मध्य प्रदेश और गुजरात में आनंद की धारा बह रही है. नदी जोड़ो परियोजनाओं का लाभ पड़ोसी राज्यों राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है.
जल संचय के इस अभियान में देशभर के जल स्रोतों के विकास कार्य करने का निर्णय लिया गया है. इस अभियान के तहत 2500 करोड़ की राशि से सभी विधानसभा, नगरीय निकायों और पंचायत स्तर पर जल संवर्धन और संचय के कार्य किए जाएंगे. पहले वर्ष में 30 दिन, दूसरे वर्ष में 120 दिन और अब तीसरे वर्ष में गुड़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक यह अभियान चलाया जा रहा है.
मुख्यमंत्री यादव ने इंदौर में अमृत 2.0 परियोजना के तहत 12.72 करोड़ की लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ की लागत से लिम्बोदी तालाब और 3.82 करोड़ की लागत से छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार कार्यों का भूमि-पूजन किया.
उन्होंने जल के अपव्यय को रोकने और एक-एक बूंद के संग्रहण के लिए शपथ दिलाते हुए कहा कि ‘जल ही जीवन है, जल है तो कल है’ के मूल मंत्र के साथ जागरूकता फैलानी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाया जा रहा है, जिसमें मध्य प्रदेश का जल गंगा संवर्धन अभियान भी शामिल है.
इंदौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान के पहले वर्ष में नगर निगम द्वारा पुरानी बावड़ियों और तालाबों के गहरीकरण और पुनरुद्धार का कार्य किया गया है. उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण में भागीदारी की अपील की और कहा कि यह अभियान केवल सरकारी नहीं, बल्कि जन-जन का आंदोलन होना चाहिए.