
नई दिल्ली, मार्च 4: टोक्यो ओलंपिक 2020 में डिस्कस थ्रो में कमलप्रीत कौर का नाम चमका. उन्होंने फाइनल में अपनी जगह बनाई, 64 मीटर का थ्रो फेंककर. वह इस खेल में फाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं. हालांकि, उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा.
कमलप्रीत का खेलों के प्रति लगाव बचपन से था. वह स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में सक्रिय रहीं. आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद, उनके किसान पिता कुलदीप सिंह ने उनका समर्थन किया. कमलप्रीत ने शुरुआत में गोला फेंकने की इच्छा जताई, लेकिन साई केंद्र से जुड़ने के बाद उन्होंने डिस्कस थ्रो को चुना.
उन्होंने जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया और धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा निखरने लगी. 2013 में अंडर-18 नेशनल चैंपियनशिप में दूसरे स्थान पर रहीं. अगले साल, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़ने के बाद, वह जूनियर चैंपियन बनीं. 2016 में, उन्होंने 65.06 मीटर का थ्रो फेंककर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा.
कमलप्रीत ने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई टूर्नामेंट्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया. उनके प्रदर्शन ने साबित किया कि भारतीय महिला खिलाड़ी ट्रैक एंड फील्ड में विश्व स्तर पर मुकाबला कर सकती हैं. उनकी मेहनत और आत्मविश्वास ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाया.
कोरोना काल में, कमलप्रीत ने डिप्रेशन का सामना किया और इससे बचने के लिए गांव में क्रिकेट खेलना शुरू किया. टोक्यो ओलंपिक में उनके दमदार प्रदर्शन ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. वह सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा बनीं, यह संदेश देते हुए कि स्पष्ट लक्ष्य और मेहनत से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है.