
नई दिल्ली, मार्च 10: भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता. इसके बाद, टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, जय शाह और गौतम गंभीर हनुमान मंदिर गए. टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर ट्रॉफी लेकर मंदिर जाने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए यह सही नहीं था.
कीर्ति आजाद ने बातचीत में कहा, “आप टीम के लिए खेलते हैं. देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं. सभी उस टीम का हिस्सा हैं. 1983 में जब हम जीते थे, तब भी सभी धर्मों के लोग थे. खिलाड़ी और खेल का कोई मजहब नहीं होता, वो अपनी टीम का होता है. इन लोगों ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा किया है.” उन्होंने संजू सैमसन और मोहम्मद शिराज की तारीफ करते हुए कहा कि टीम भारत, हिंदुस्तान की टीम है.
उन्होंने ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर सवाल उठाते हुए कहा, “फिर भारत और पाकिस्तान में क्या अंतर रह गया?” कीर्ति आजाद ने कहा, “मैं खुद हिन्दू हूं, लेकिन खेलते वक्त कभी धर्म को नहीं जोड़ा. आर्ट का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए मैंने इसका विरोध किया. हर मैच से पहले और बाद में मैं भी मंदिर जाता था. हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए जो हुआ वह सही नहीं था.”
कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर ट्रॉफी को मंदिर में ले जाने पर तीखी आलोचना की थी. उन्होंने लिखा था कि टीम इंडिया पर शर्म आती है. उन्होंने याद दिलाया कि 1983 में कपिल देव की कप्तानी में हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के खिलाड़ी थे. “हम ट्रॉफी को अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लाए थे. आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?” उन्होंने आगे कहा.
कीर्ति आजाद ने स्पष्ट किया कि यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है, न कि सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का. “सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए. संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए. यह ट्रॉफी हर धर्म के भारतीयों की है. यह किसी एक धर्म की जीत नहीं है.”