
नई दिल्ली, फरवरी 26: बांग्ला साहित्य में कई रचनाकारों ने अपनी कलम का जादू बिखेरा है. इनमें से एक हैं लीला मजूमदार, जो बाल साहित्य की जादूगरनी के रूप में जानी जाती हैं. उन्होंने बच्चों की कहानियों से लेकर वयस्क उपन्यासों तक हर आयु के पाठकों को समृद्ध किया.
लीला मजूमदार की रचनाएं न केवल बच्चों को पसंद आईं, बल्कि महिलाओं के जीवन और संघर्षों की सच्ची हितैषी भी साबित हुईं. उनका जन्म 26 फरवरी 1908 को कोलकाता में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ. उनके पिता प्रमदा रंजन रे, प्रसिद्ध लेखक उपेंद्रकिशोर राय चौधरी के छोटे भाई थे. उन्होंने अपने बचपन के शुरुआती साल शिलांग में बिताए और स्कूली शिक्षा लोरेटो कॉन्वेंट और सेंट जॉन्स डायोसेसन स्कूल से प्राप्त की.
कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में ऑनर्स और मास्टर्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद, उन्होंने शिक्षण कार्य दार्जिलिंग के महारानी गर्ल्स स्कूल में शुरू किया. रवींद्रनाथ टैगोर के आग्रह पर वे शांतिनिकेतन में शामिल हुईं. बाद में उन्होंने आशुतोष कॉलेज और ऑल इंडिया रेडियो में भी काम किया. रेडियो पर उन्होंने ‘महिला महल’ सीरीज में ‘मोनिमाला’ नामक किरदार रचा, जो एक साधारण मध्यमवर्गीय बंगाली लड़की की जिंदगी को खूबसूरती से दर्शाता है.
लीला मजूमदार का साहित्यिक सफर किशोरावस्था में चाचा उपेंद्रकिशोर द्वारा शुरू की गई पत्रिका ‘संदेश’ में कहानी ‘लक्खी छेले’ से शुरू हुआ. उनकी पहली बच्चों की किताब ‘बैद्यनाथर बोरी’ आई, लेकिन ‘दिन दुपुरे’ ने आलोचकों की प्रशंसा बटोरी और उन्हें ख्याति दिलाई. उन्होंने कुल 125 से अधिक किताबें लिखीं, जिनमें कहानी संग्रह, उपन्यास, कविताएं, संस्मरण, रसोई की किताबें, अनुवाद और संपादित ग्रंथ शामिल हैं.
लीला मजूमदार की कहानियां रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाई को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती थीं, लेकिन उनमें गहरा जादू और संवेदनशीलता थी. उन्होंने मजबूत महिला पात्र रचे, जो घरेलू जीवन की जटिलताओं को उजागर करते थे. बच्चों के लिए उन्होंने सपनों भरी दुनिया बनाई, जबकि वयस्क पाठकों को पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मुद्दों पर सोचने को मजबूर किया.
उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘बक बध पाला’ एक हास्य-नाटक है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार भी मिला. उपन्यास ‘पाडी पिशिर बोरमी बक्शो’ पर सत्यजीत रे फिल्म बनाने की योजना बना चुके थे, जिसे बाद में अरुंधति देवी ने फिल्माया. उन्होंने शेक्सपियर, जोनाथन स्विफ्ट और अर्नेस्ट हेमिंग्वे जैसे लेखकों के कार्यों का बांग्ला अनुवाद भी किया.