
नई दिल्ली, फरवरी 19: देश में ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी कलाकारी से अमिट छाप छोड़ी है. ऐसे ही एक जादूगर हैं राम वी. सुतार, जिन्होंने छेनी-हथौड़ा लेकर पत्थरों में प्राण फूंक दिए. उनकी कलाकारी ने कई महापुरुषों की मूर्तियों को आकार दिया. राम वी. सुतार, जिन्हें ‘स्टैच्यू मैन’ के नाम से जाना जाता है, की जयंती 19 फरवरी को मनाई जाती है.
राम सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गुंडूर गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था. उन्होंने अपनी कला के माध्यम से भारत के इतिहास, संस्कृति और एकता को अमर किया. उनकी विलक्षण प्रतिभा पर सबसे पहले उनके गुरु रामकृष्ण जोशी की नजर पड़ी, जिन्होंने उन्हें मुंबई के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लेने की सलाह दी.
बचपन से संघर्षों का सामना करते हुए, राम सुतार ने अपनी शिक्षा में हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त किया और अंतिम वर्ष में गोल्ड मेडल से सम्मानित हुए. 1950 के दशक में, उन्होंने भारतीय पुरातत्व विभाग के लिए एलोरा और अजंता की प्राचीन कलाकृतियों के संरक्षण और पुनर्स्थापना का कार्य किया. उनके द्वारा बनाई गई कई मूर्तियां आज देशभर में स्थापित हैं, जो स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रीय नेताओं, समाज सुधारकों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की जीवंत छवि प्रस्तुत करती हैं.
राम सुतार की कला की विशेषता यह थी कि वे केवल भव्य आकार नहीं देते थे, बल्कि चेहरे के भाव, आंखों की चमक, शरीर की मुद्रा और व्यक्ति के जीवन दर्शन को भी पत्थर या कांसे में बखूबी उतारते थे. उनकी मूर्तियां जीवंत प्रतीत होती हैं.
उन्होंने कई प्रसिद्ध मूर्तियों को आकार दिया, जिनमें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी शामिल है, जो गुजरात के केवड़िया में सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति है. यह भारत की एकता और संकल्प का प्रतीक है. इसके अलावा, महात्मा गांधी की ध्यान मुद्रा में बैठी प्रतिमा और छत्रपति शिवाजी महाराज की घोड़े पर सवार भव्य मूर्ति भी शामिल हैं. डॉ. बीआर अंबेडकर, स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, वी.डी. सावरकर और अन्य नेताओं की स्मारक मूर्तियां विभिन्न राज्यों में स्थापित हैं.
राम सुतार के योगदान को सम्मानित करते हुए, भारत सरकार ने उन्हें 1999 में पद्म श्री और 2016 में पद्म भूषण से नवाजा. महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार भी प्रदान किया. वे अपने अंतिम समय तक सक्रिय रहे और युवा कलाकारों को प्रेरित करते रहे.