पश्चिम बंगाल चुनाव: कोलकाता दक्षिण में टीएमसी का प्रभाव

कोलकाता, मार्च 17: पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है. इस बार मतदान केवल दो चरणों में होगा, जो 23 और 29 अप्रैल को संपन्न होगा. राजनीतिक दलों ने चुनावी तैयारियों में जुटना शुरू कर दिया है. आइए जानते हैं कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण.

कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का मजबूत गढ़ है. यहां की सभी सात विधानसभा सीटों – कसबा, बेहाला पूर्व, बेहाला पश्चिम, कोलकाता पोर्ट, भवानीपुर, रासबिहारी और बालिगंज – पर टीएमसी की मजबूत पकड़ है.

कसबा एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है, जो दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है. यह सीट हमेशा टीएमसी के लिए फायदेमंद रही है. पिछले तीन विधानसभा चुनावों में टीएमसी के विधायक जावेद अहमद खान ने जीत हासिल की है. भाजपा इस सीट पर टीएमसी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी है.

बेहाला पूर्व विधानसभा सीट पर टीएमसी का दबदबा रहा है. 2021 में टीएमसी की रत्ना चटर्जी ने भाजपा की पायल सरकार को 37,428 वोटों से हराकर जीत दर्ज की. हालांकि, भाजपा का वोट शेयर बढ़ना टीएमसी के लिए चिंता का विषय है.

बेहाला पश्चिम भी टीएमसी का गढ़ है. पार्टी ने यहां लगातार जीत हासिल की है. टीएमसी के पार्थ चटर्जी ने 2011 में सीपीआई(एम) के अनुपम देबसरकार को 59,021 वोटों से हराया. लोकसभा चुनावों में भी टीएमसी की पकड़ बनी हुई है.

कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट पर भी टीएमसी का दबदबा है. 2011 से यहां टीएमसी के उम्मीदवार फिरहाद हकीम ने लगातार जीत हासिल की है. 2026 में टीएमसी इस सीट पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए प्रयासरत है.

भवानीपुर, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का निवास है, टीएमसी के लिए एक महत्वपूर्ण सीट है. ममता बनर्जी ने यहां उपचुनावों और नियमित चुनावों में शानदार जीत हासिल की है. यदि वह 2026 में यहां से चुनाव लड़ती हैं, तो उनकी जीत की संभावना मजबूत है.

रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र में भी टीएमसी का प्रभाव है. 2021 में टीएमसी के देबाशिष कुमार ने भाजपा के ले. जनरल (डॉ.) सुभ्रत साहा को हराया. हालांकि, भाजपा ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है, जो टीएमसी के लिए चुनौती बन सकती है.

बालिगंज कोलकाता के प्रभावशाली इलाकों में से एक है. यहां टीएमसी का दबदबा 2006 से बना हुआ है. 2022 में हुए उपचुनाव में टीएमसी ने बाबुल सुप्रियो को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने सीपीआई(एम) की सायरा शाह हलीम को हराकर सीट बरकरार रखी.

वर्तमान राजनीतिक स्थिति में टीएमसी यहां मजबूत स्थिति में है, जबकि भाजपा और वाम-कांग्रेस गठबंधन चुनौती देने की स्थिति में नहीं हैं.

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