नारी पहले से सशक्त, समाज की सोच में बदलाव जरूरी: डॉ. प्रीति गोयल

नई दिल्ली, 7 मार्च: हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. इसी अवसर पर दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय सेविका समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारती नारी से नारायणी’ का शनिवार को उद्घाटन हुआ.

इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. प्रीति गोयल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं. उन्होंने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, “मुझे इस कार्यक्रम में चीफ और स्पेशल गेस्ट के रूप में बुलाया गया है. मैंने 30-32 साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाया है और अब मैं वॉलंटरी रिटायरमेंट के बाद अपने काम में व्यस्त हूं. मैं राष्ट्रीय सेविका समिति से तब से जुड़ी हूं जब मैं 10 साल की थी.”

डॉ. गोयल ने नारी सशक्तीकरण पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “मेरे अनुसार नारी पहले से ही सशक्त है. हमें ‘सशक्तीकरण’ शब्द का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. माताएं पहले से ही सशक्त हैं, केवल समाज में बदलाव की आवश्यकता है.”

उन्होंने आगे कहा, “यह बदलाव सरकार की ओर से आना चाहिए और पुरुष समाज में भी परिवर्तन की आवश्यकता है.”

समाज में परिवर्तन के सवाल पर डॉ. गोयल ने कहा, “यह बदलाव इसलिए हो रहा है क्योंकि लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. समाज की सोच में कुछ बदलाव अपने आप हो रहा है, और पुरुषों की मानसिकता में भी कुछ परिवर्तन आया है.”

महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता की भावना पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “अभी तक समाज में महिलाओं के प्रति समानता की भावना नहीं है. महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा काम करती हैं. वे घर संभालती हैं और अपने प्रोफेशनल काम को भी बखूबी निभाती हैं. अगर देखा जाए तो 60 प्रतिशत काम महिलाएं करती हैं और पुरुष 40 प्रतिशत.”

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