
नई दिल्ली, 12 फरवरी: भारतीय समुद्री क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस क्षेत्र से 70-80 प्रतिशत व्यापार गुजरता है. व्यापार और सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय नौसेना अपने बेड़े में नए जंगी जहाज और एयरक्राफ्ट शामिल कर रही है. इसी क्रम में, रक्षा मंत्रालय ने लंबी दूरी तक टोह लेने वाले 6 अतिरिक्त पी-8आई विमानों की खरीद को मंजूरी दी है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में भारतीय नौसेना के लिए इन विमानों की आवश्यकता को स्वीकार किया गया. मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि पी-8आई विमानों की खरीद से नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी.
यह खरीद अमेरिका से की जाएगी. भारतीय नौसेना में पहले से ही 12 पी-8आई विमान शामिल हैं. पहले चरण में 2009 में 8 और दूसरे चरण में 2016 में 4 विमानों की खरीद की गई थी. नवंबर 2019 में, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 6 अतिरिक्त विमानों की आवश्यकता को स्वीकार किया था. हर एओएन की एक समय सीमा होती है. यदि समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो इसे बढ़ाया जा सकता है या नए सिरे से मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है.
अमेरिका ने मई 2021 में 6 पी-8आई विमानों और संबंधित उपकरणों की संभावित बिक्री को मंजूरी दी थी. पिछले साल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान, समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए इन विमानों की खरीद का कार्य जल्द पूरा करने की बात कही गई थी.
पी-8आई विमानों की विशेषता यह है कि ये 41,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए समुद्र की गहराई में छिपी पनडुब्बियों को खोज सकते हैं और उन पर हमला कर सकते हैं. ये एक बार में 8,300 किलोमीटर तक उड़ान भर सकते हैं. विमान में 11 हार्ड पॉइंट हैं, जिनमें 5 आंतरिक और 6 बाहरी हैं. यह एंटीशिप मिसाइल हारपून, क्रूज मिसाइल, लाइटवेट टॉरपीडो, एंटी सबमरीन वॉरफेयर चार्ज और माइन लॉन्च कर सकता है. विमान एक शक्तिशाली मल्टी मिशन सर्फेस सर्च रडार से लैस है.