
नई दिल्ली, 11 फरवरी: अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण लोग मानसिक और शारीरिक बीमारियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में योगासन को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना बेहद फायदेमंद हो सकता है. योग विशेषज्ञ हृदय मुद्रा के अभ्यास की सलाह देते हैं, जिसे अपान वायु मुद्रा या मृत्संजीवनी मुद्रा भी कहा जाता है.
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, हृदय मुद्रा हृदय स्वास्थ्य और भावनात्मक मजबूती के लिए बहुत प्रभावी है. यह एक सरल हस्त मुद्रा है, जो प्राण ऊर्जा को हाथों के माध्यम से हृदय क्षेत्र की ओर प्रवाहित करती है. इससे हृदय की ताकत और ऊर्जा में वृद्धि होती है, साथ ही हृदय से जुड़ी नाड़ियां सक्रिय होती हैं.
हृदय मुद्रा का नियमित अभ्यास हृदय को मजबूत बनाता है और भावनात्मक बोझ को कम करता है. यह दबी हुई भावनाओं को मुक्त करने में मदद करती है. तनाव, मानसिक संघर्ष या किसी संकट की स्थिति में यह मुद्रा बेहद उपयोगी साबित होती है. यह अनाहत चक्र (हृदय चक्र) को जागृत करती है, जिससे व्यक्ति में शांति, प्रेम और संतुलन की भावना बढ़ती है.
यह मुद्रा रक्त संचार को सुधारती है, नर्वस सिस्टम को शांत करती है और हृदय संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकती है. इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है.
एक्सपर्ट के अनुसार, इस मुद्रा का अभ्यास करने के लिए किसी आरामदायक स्थिति में बैठें, जैसे सुखासन या पद्मासन. रीढ़ को सीधा रखें और दोनों हाथों को घुटनों पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर. तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे के आधार पर लगाएं. फिर मध्यमा और अनामिका उंगलियों के सिरों को अंगूठे के सिरे से स्पर्श कराएं. छोटी उंगली को सीधा और ढीला रखें. आंखें बंद करके गहरी सांस लें और ध्यान हृदय क्षेत्र पर केंद्रित करें. रोजाना 10 से 30 मिनट तक इस मुद्रा का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है.
यह मुद्रा सरल और लाभकारी है, जिसे सभी उम्र के लोग कर सकते हैं. हालांकि, यदि किसी को गंभीर हृदय रोग है, तो योग विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है.