
नई दिल्ली, 15 फरवरी: भारत और फ्रांस के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा संवाद होने जा रहा है. यह संवाद सैन्य तकनीक और रक्षा क्षेत्र की तैयारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस संवाद में शामिल होंगे, जबकि फ्रांस की रक्षा मंत्री भी बैठक में उपस्थित रहेंगी.
17 फरवरी को दोनों देशों के रक्षा मंत्री इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे. इस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर्नाटक के वेमगल में टाटा एयरबस की एच 125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे.
यह भारत और फ्रांस के बीच छठा वार्षिक संवाद है, जो बेंगलुरु में आयोजित होगा. बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की पूरी समीक्षा की जाएगी, विशेषकर रक्षा उद्योग में साझेदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा. रक्षा समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाने की संभावना है, साथ ही हैमर मिसाइलों के संयुक्त निर्माण के लिए समझौता भी हो सकता है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत और फ्रांस के रिश्तों में रक्षा सहयोग हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है. दोनों देश नियमित रूप से ‘शक्ति’, ‘वरुणा’ और ‘गरुड़’ जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं. फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वाउटरिन की यह पहली भारत यात्रा होगी, जो अक्टूबर 2025 में पद संभालने के बाद हो रही है.
भारत और फ्रांस के संबंधों में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है. हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय आदान-प्रदान से दोनों देशों के रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं. जुलाई 2023 में, प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के बास्तील दिवस समारोह में मुख्य अतिथि रहे, जबकि 2024 के गणतंत्र दिवस परेड में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे.
हाल ही में, रक्षा मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण बैठक में मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट राफेल की खरीद को मंजूरी दी गई है. भारतीय वायुसेना के लिए नए राफेल लड़ाकू विमान का यह सौदा फ्रांस के साथ होगा.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) की बैठक 12 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी. बैठक में वायुसेना के लिए राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट, आधुनिक कॉम्बैट मिसाइलों और हाई एल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट खरीदने को मंजूरी दी गई है.
गौरतलब है कि पिछले वर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल की मदद से पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था. राफेल जैसे लड़ाकू विमान वायुसेना को दुश्मन पर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत देंगे. रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अच्छी बात यह है कि ज्यादातर विमान भारत में ही बनाए जाएंगे, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा. भारतीय वायुसेना पहले से ही राफेल विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है. वर्तमान में, इन विमानों की दो स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना का हिस्सा हैं.