भूख न लगना: सामान्य समस्या या गंभीर चेतावनी?

नई दिल्ली, 20 फरवरी: आजकल कई लोगों में भूख न लगने की समस्या आम हो गई है. इसे अक्सर थकान या व्यस्त दिनचर्या का असर समझकर नजरअंदाज किया जाता है. लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो यह शरीर के लिए एक गंभीर संकेत हो सकता है. आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि भूख न लगना शरीर में असंतुलन या किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है.

आयुर्वेद के अनुसार, पाचन शक्ति कमजोर होने पर भोजन में रुचि कम हो जाती है. वहीं, विज्ञान का मानना है कि हार्मोनल बदलाव, तनाव या बीमारी के कारण मस्तिष्क और पेट के बीच का संचार सही तरीके से नहीं होता, जिससे भूख महसूस नहीं होती.

भूख न लगने के सबसे सामान्य कारणों में पाचन संबंधी समस्याएं शामिल हैं. यदि पेट में गैस, एसिडिटी या कब्ज जैसी दिक्कतें हों, तो शरीर भोजन की मांग कम कर देता है. आयुर्वेद में इसे ‘अजीर्ण’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि जब पाचन सही ढंग से काम नहीं करता, तो खाने की इच्छा कम हो जाती है. पेट में भारीपन या जलन की समस्या भी उत्पन्न होती है.

बीमारियां भी भूख न लगने का एक बड़ा कारण हैं. सर्दी-जुकाम, बुखार, वायरल संक्रमण, पेट की सूजन या फूड पॉइजनिंग जैसी स्थितियां शरीर को कमजोर कर देती हैं. इस दौरान शरीर ऊर्जा बचाने की कोशिश करता है और भोजन को पचाने में समय नहीं लगाना चाहता, जिससे भूख कम हो जाती है.

तनाव और मानसिक स्थिति का भी भूख पर गहरा असर होता है. अत्यधिक चिंता, डिप्रेशन या उदासी हार्मोन को प्रभावित करती है. इस बदलाव के कारण मस्तिष्क भूख के संकेत पेट को नहीं भेज पाता. आयुर्वेद इसे ‘मन-आहार’ के असंतुलन से जोड़ता है. जब मन परेशान होता है, तो शरीर की अग्नि कमजोर हो जाती है और खाने में रुचि कम हो जाती है.

कुछ दवाइयां भी भूख को प्रभावित कर सकती हैं. उदाहरण के लिए, एंटीबायोटिक्स, कैंसर की दवाएं, दर्द निवारक और डिप्रेशन की दवाइयां शरीर की प्राकृतिक भूख को कम कर सकती हैं. विज्ञान के अनुसार, ये दवाइयां पेट और मस्तिष्क के बीच के हार्मोनल संकेतों को बदल देती हैं, जिससे भूख महसूस नहीं होती.

यदि भूख न लगना कई दिनों तक बना रहे, वजन घटने लगे, कमजोरी महसूस हो या शरीर में पोषण की कमी दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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