
नई दिल्ली, 3 मार्च: समुद्र का जल केवल नीला या हरा नहीं होता, बल्कि कई बार यह पीला, लाल और अन्य रंगों में भी दिखाई देता है. महासागरों के रंग में यह भिन्नता सूर्य के प्रकाश और जल में मौजूद सूक्ष्म जीवों, वनस्पतियों, शैवाल (एल्गी), खनिज कणों और घुले हुए कार्बनिक पदार्थों की आपसी प्रतिक्रिया का परिणाम है.
ये तत्व प्रकाश की विभिन्न तरंगदैर्ध्य (वेवलेंथ) को अलग-अलग तरीके से अवशोषित और परावर्तित करते हैं, जिससे पानी का रंग बदलता है.
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, ‘ओशन कलर’ वास्तव में जल की सतह से परावर्तित होने वाली रोशनी का एक स्पेक्ट्रल कंपोजिशन है. शुद्ध जल प्रकाश को अधिक अवशोषित करता है, जिससे वह नीला दिखाई देता है. वहीं, जिन क्षेत्रों में फाइटोप्लांकटन की अधिकता होती है, वहां क्लोरोफिल की उपस्थिति के कारण जल हरा नजर आता है. अधिक जैविक सक्रियता वाले उत्पादक क्षेत्र अक्सर हरे दिखाई देते हैं, जबकि कम सक्रियता वाले क्षेत्र नीले होते हैं. समुद्र का यह बदलता रंग समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य, फाइटोप्लांकटन की सघनता और जैविक गतिविधियों के महत्वपूर्ण संकेत देता है.
वैज्ञानिक इन रंगों का अध्ययन करके समुद्रों, झीलों और तटीय इलाकों में हो रही गतिविधियों को समझते हैं. इससे हानिकारक एल्गल ब्लूम का पता लगाना और भविष्यवाणी करना आसान हो जाता है. एल्गल जहरीले एल्गी के तेज बढ़ने से होते हैं, जो मछलियों, समुद्री जीवों और इंसानी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं.
ओशन कलर डेटा से पानी की गुणवत्ता की जांच होती है, जिससे मछली पालन, मछुआरों और तटीय लोगों को लाभ मिलता है. यह समुद्री संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में भी मदद करता है. अमेरिकन नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ओशन कलर प्रोडक्ट्स का पूरा सेट उपलब्ध कराता है, जो नासा और अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट्स से डेटा इकट्ठा करके बनाए जाते हैं. इनका उपयोग पानी की गुणवत्ता जांचने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए मॉनिटरिंग में होता है.
8 फरवरी 2024 को नासा ने प्लैंकटन एरोसोल क्लाउड ओशन इकोसिस्टम मिशन लॉन्च किया था. यह मिशन समुद्र और जलवायु को बेहतर समझने का नया संसाधन है. यह फाइटोप्लांकटन की वितरण मापता है, जो पानी के खाद्य श्रृंखला को बनाए रखते हैं. इसके ओशन कलर इंस्ट्रूमेंट बारीक वेवलेंथ पर रोशनी मापता है, जिससे विभिन्न ग्रुप्स की पहचान आसान होती है. मिशन पहले ही इमेज और डेटा साझा कर चुका है, जो ओशन हेल्थ, एयर क्वालिटी और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाते हैं. यह डेटा जनता के लिए मुफ्त उपलब्ध है.
नोआ और नासा मिलकर इस मिशन पर काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य ऑपरेशनल उपयोग के लिए है. इसमें इकोसिस्टम इंडिकेटर्स में सुधार, ओशन मैनेजमेंट टूल्स और जलवायु मॉडल्स का वेरिफिकेशन शामिल है. दोनों एजेंसियां तटीय पानी के कॉम्प्लेक्स कलर डेटा को सटीक बनाने की कोशिश कर रही हैं. मिशन का लक्ष्य पानी के संसाधनों, आपदा प्रभाव, पारिस्थितिकी पूर्वानुमान, हवा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य क्षेत्रों में समाज को लाभ पहुंचाना है.