उड्डियान बंध: शरीर को भीतर से शुद्ध करने की कला

नई दिल्ली, 4 मार्च: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में स्वस्थ रहना एक बड़ी चुनौती बन गया है. अनियमित दिनचर्या, जंक फूड का सेवन, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही हैं.

ऐसे में योग और प्राणायाम को दैनिक जीवन में शामिल करना अत्यंत आवश्यक हो गया है. ये प्राचीन भारतीय अभ्यास स्वस्थ मन और शरीर के लिए लाभकारी हैं.

उड्डियान बंध, जिसे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने दैनिक जीवन में शामिल करने की सलाह दी है, केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं है. यह शरीर को भीतर से शुद्ध करने की एक कला है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट की मांसपेशियों को टोन करने के लिए सबसे प्रभावी योग क्रियाओं में से एक है. इसे ‘उदर का ताला’ भी कहा जाता है.

आयुष मंत्रालय ने इस विधि के लाभ और इसे करने की सही तकनीक के बारे में जानकारी दी है. इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले पद्मासन, वज्रासन या सुखासन मुद्रा में सावधानीपूर्वक बैठें.

इसके बाद, अपनी हथेलियों को घुटनों पर रखें और मुंह से सारी वायु बाहर निकालें. फिर श्वास अंदर खींचकर कुछ देर रोकें और जालंधर बंध (थ्रोट लॉक) लगाएं. इसके बाद, पेट की मांसपेशियों को अंदर और ऊपर खींचें. श्वास को यथासंभव बिना परेशानी के रोकें और धीरे-धीरे जालंधर बंध छोड़ें. फिर श्वास धीरे-धीरे अंदर खींचें और पेट की मांसपेशियों को सामान्य होने दें.

उड्डियान बंध योग की एक शक्तिशाली क्रिया है, जिसमें श्वास पूरी तरह बाहर छोड़कर पेट की मांसपेशियों को रीढ़ की ओर अंदर और ऊपर की ओर खींचा जाता है. इस व्यायाम को नियमित रूप से करने से पाचन क्रिया, ऊर्जा प्रवाह और मानसिक शांति में सुधार होता है.

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