अमेरिका में नए वैरिएंट के केस 11 हजार के पार

न्यूयॉर्क . अमेरिका में कोरोना संक्रमण के सबसे खतरनाक वैरिएंट के 11 हजार 500 मामले सामने आए हैं. इसे सुपर स्प्रेडर यानी तेजी से फैलने वाला माना जाता है. अमेरिकी एक्सपट्र्स को आशंका है कि देशव्यापी वैक्सीन ड्राइव के बीच इस वैरिएंट के केसेस का सामने आना चिंता की बात है. ऐसे में दुनियाभर में वैक्सीनेशन को पूरा करना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है. नहीं तो ऐसे स्ट्रेन उभर आएंगे, जो मौजूदा वैक्सीन को बेअसर कर देंगे.

फिलहाल न्यूयॉर्क, मिशिगन, विस्कोंसिन और अन्य अमेरिकी राज्यों में इसी स्ट्रेन के कारण संक्रमण के नए हॉटस्पॉट बन गए हैं. अमेरिका में कोरोना (Corona virus) संक्रमण से पीडि़त कुल लोगों में 26 फीसदी इस स्ट्रेन के कारण बीमार हुए हैं. इस स्ट्रेन से संक्रमित लोगों की संख्या औसतन 7 से 10 दिन में दो गुनी हो रही है. कैलिफोर्निया में पाए गए संस्करण मूल कोविड-19 (Covid-19) से 20 फीसदी ज्यादा खतरनाक है.

ब्रिटेन में ब्लड क्लॉटिंग के 25 नए मामले

एस्ट्राजेनेका की डोज लेने के बाद ब्रिटेन में रेयर ब्लड क्लॉटिंग (खून के थक्के) के 25 नए मामले सामने आए हैं. रेगुलेटरी एजेंसी ने गुरुवार (Thursday) को एक बयान में कहा कि 24 मार्च के बाद रेयर ब्लड क्लॉटिंग के कुल मामले अब 30 तक पहुंच गए हैं. हालांकि, नियामक ने कहा कि जोखिमों के आगे ही वैक्सीन के फायदे मिलेंगे. बता दें कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने विकसित किया है. इससे पहले वैक्सीन लगने के बाद सामने आए ब्लड क्लॉट के मामलों के मद्देनजर कई यूरोपियन देशों ने वैक्सीन लगाने पर रोक लगा दी थी. हालांकि, बाद में यूरोपियन मेडिकल एजेंसी ने जांच के बाद वैक्सीन के प्रयोग को हरी झंडी दे दी.

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