Thursday , 21 October 2021

तालिबान ने हज्‍जामों के शेविंग करने और दाढ़ी को काटने पर लगाई पाबंदी

काबुल . अफगानिस्तान में तालिबानी राज के साथ ही उनके काले कानूनों को लागू करने का सिलसिला शुरू हो गया हैं. तालिबान तंकियों ने अफगानिस्‍तान के लमंद प्रांत में हज्‍जामों को शेविंग करने या दाढ़ी को काटने पर पाबंदी लगा दी है. खबरों में कहा गया है कि तालिबान ने देश के दक्षिणी हिस्‍से में स्थित हेलमंद प्रांत में स्‍टालिश हेयरस्‍टाइल और दाढ़ी बनाने पर रोक लगा दी है. तालिबान के इस्‍लामिक ओरिएंटेशन मंत्रालय ने हज्‍जामों के साथ बैठक करके यह आदेश जारी किया है. एक मीडिया (Media) रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय के अधिकारियों ने हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्‍कर गाह में हज्‍जामों को स्‍टालिश हेयर स्‍टाइल और दाढ़ी बनाने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है. इस आदेश को सोशल मीडिया (Media) में जारी किया गया है. इसमें यह भी कहा गया है कि सैलून के अंदर संगीत या अन्‍य धार्मिक गीत न बजाए जाएं. इस बीच तालिबान ने अपने कड़े और दमनकारी कानूनों को लागू करना तेज कर दिया है.
ये कानून वही हैं जो उसने अपने वर्ष 1996 से लेकर 2001 के शासन काल के दौरान लागू किए थे. ये नियम तालिबानी शरिया कानून पर आधारित हैं.

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तालिबान ने यह आदेश ऐसे समय पर दिया है जब देश में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्‍लंघन की खबरें आ रही हैं. इससे पहले अफगानिस्तान के हेरात शहर के मुख्य चौराहे पर तालिबान ने एक शव क्रेन से लटका दिया. यह ऐसी है नृशंसता है जो तालिबान के अतीत के तौर तरीके की वापसी का संकेत देता है. चौराहे पर दवा दुकान चलाने वाले वजीर अहमद सिद्दिकी ने बताया कि चौराहे पर चार शव लाए गए जिनमें तीन शव प्रदर्शित करने के लिए शहर के अन्य चौराहों पर ले जाए गए. उसने बताया कि तालिबान ने चौराहे पर घोषणा की कि इन चारों को अपहरण के जुर्म में पकड़ा गया और पुलिस (Police) ने उन्हें मार दिया. तालिबान के संस्थापकों में एक और अफगानिस्तान में पिछले तालिबान शासन के दौरान इस्लामिक कानून की कठोर व्याख्या को लागू करने के पैरोकार मुल्ला नूरूद्दिन तुराबी ने पिछले हफ्ते कहा था कि उसके कठोर नियमों के तहत लोगों को मौत एवं अंगभंग की सजा फिर तामील की जाएगी, भले ही ऐसा सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाए.

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काबुल पर 15 अगस्त को तालिबान के काबिज होने एवं पूरे देश को नियंत्रण में लेने के बाद से अफगान एवं दुनिया यह देख रही है कि क्या वे एक बार फिर 1990 के दशक के कठोर शासन को लागू करेंगे. तालिबानी भले ही वीडियो एवं मोबाइल फोन जैसे प्रौद्योगिकीगत बदलाव को अपना रहे हों लेकिन उसके नेताओं में अब भी कट्टरपंथ एवं रूढिवादी वैश्विक दृष्टिकोण भरा पड़ा है.

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